पलामू। किसानों का कहना है कि दिन-रात मेहनत कर, कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन नीलगाय झुंड में आकर कुछ ही घंटों में पूरी फसल चट कर जाते हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जा रहा है। इस वर्ष गेहूं, चना, सरसों, अरहर, कुलथी व सब्जी की फसल सबसे ज्यादा बर्बाद हो रही है। बाड़ लगाने और पूरी रात खेतों में पहरा देने के बावजूद फसल बचाना असंभव हो गया है। कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन नीलगाय उनकी सारी मेहनत कुचल रही हैं। भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रविन्द्र कुमार सिंह, पूर्व उपप्रमुख यमुना सिंह, सिद्धि सिंह, संजय सिंह, जयप्रकाश सिंह, राहुल सिंह, अंकू सिंह राणा, अनूप सिंह, मनोज सिंह, सुधीर सिंह, प्रो. अरविन्द सिंह, अशोक सिंह, योगेन्द्र सिंह, अनिल सिंह, गोरख सिंह, लल्ली यादव, रामनाथ पासवान, पप्पू सिंह, धनंजय सिंह, अवधेश मेहता, सत्येन्द्र सिंह, भोला सिंह, संतोष सिंह, मदन सिंह, विनय सिंह, मोबिन अंसारी, दुखन रजवार, सिराजुद्दीन अंसारी सहित सैकड़ों किसानों ने गुरूवार को एक स्वर में कहा कि सरकार फसल की सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल रही है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन और उच्च न्यायालय में पीआईएल दाखिल करने को विवश होंगे। पलामू के हैदरनगर प्रखंड क्षेत्र में नीलगायों (घोड़परास) का आतंक किसानों के लिए अब सबसे बड़ी आपदा बन चुकी है। गोल्हना, रतनबिघा, बिंदुबिगहा, पतरीया, जमुआ कला, बिलासपुर, नौडीहा, सलैयाटीकर, खरगाड़ा, सजवन, सलेमपुर, सड़ेया, कुकही, इमामनगर बरेवा, बरवाडीह, लोहरपुरा सहित दर्जनों गांवों में किसानों की लहलहाती फसलें रातों रात बर्बाद हो रही हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि किसानों का सब्र टूटने लगा है। सभी प्रभावित गांवों के किसानों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बिहार सरकार की तर्ज पर नीलगायों को ‘वर्मीन’ घोषित कर ‘शूट एंड साइट’ आदेश जारी करने की मांग की है।
