मां चंद्रघंटा की आराधना में डूबे भक्त , गूंजे भक्ति के जयकारे मंदिरों में उमड़ी आस्था की भीड़

सुपौल। चैती नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना के साथ पूरा सुपौल भक्ति के रंग में रंग गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। हर ओर “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों से वातावरण गूंजायमान हो उठा। मां के दरबार में माथा टेकने के लिए महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में पहुंचे और सुख-समृद्धि की कामना की।

शहर के प्रमुख देवी मंदिरों के साथ-साथ गांवों के छोटे-छोटे पूजा स्थलों पर भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ मां चंद्रघंटा की आराधना की। मान्यता है कि मां का यह स्वरूप भक्तों के भय को दूर कर साहस और शांति प्रदान करता है। इसी आस्था के साथ भक्तों ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा में भाग लिया।

मंदिरों में सुबह से ही दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का पाठ शुरू हो गया, जो पूरे दिन चलता रहा। इन मंत्रों की गूंज से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। कई जगहों पर भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालु झूमते नजर आए। ढोल-नगाड़ों की धुन और घंटियों की आवाज ने माहौल को और भी अलौकिक बना दिया।

शाम होते ही महाआरती का दृश्य अत्यंत मनोहारी बन गया। दीपों की रोशनी और अगरबत्ती की सुगंध के बीच श्रद्धालुओं ने एक साथ मां की आरती उतारी। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर चेहरा आस्था और विश्वास से भरा नजर आया।

नवरात्र के इस पावन अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क दिखा। मंदिरों के आसपास साफ-सफाई और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

मां चंद्रघंटा की भक्ति में डूबा सुपौल इन दिनों पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवरात्र का यह उत्सव लोगों के जीवन में नई आशा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहा है।

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