पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का आरोप- मौजूदा पेसा कानून आदिवासियों के हित में नहीं

खूंटी। मुरहू थाना क्षेत्र के कुंजला बगीचा में शनिवार को तिड़ू पड़हा जनी शिकार मेला का आयोजन किया गया। इस दौरान 56 मौजा के महिला पुरुष और बच्चे भारी संख्या में जतरा सह सह जनी शिकार मेला में पहुंचे। जनजातीय वेशभूषा पहनकर रुढ़िवादी परम्परा के साथ नाच-गान किया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री सह पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा उपस्थित थे।

इस मौके पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि रूढ़िवादी जनजातीय संस्कृति ही आदिवासियत है। लेकिन शिक्षा और दूरदर्शिता की कमी के कारण हमारी पुरातन संस्कृति नष्ट होती जा रही है। उन्होंने कहा कि मुगल काल से लेकर वर्तमान समय तक जनजातीय रुढ़िवादी संस्कृति का क्षय होता रहा है। मुंडा ने कहा कि जितना मुगल काल जनजातीय संस्कृति के लिए घातक नहीं हुआ, उससे अधिक आघात अंग्रेज शासन में हुआ। अर्जुन मुंडा ने कहा कि आदिवासी की पहचान उनकी संस्कृति से है। इसकी रक्षा पेसा कानून के तहत होना था, पर इस बार लागू किया गया पेसा कानून मुण्डा, मानकी पुराने रुढ़िवादी संस्कृति के लिए अच्छा नहीं है।

मौके पर तिड़ू पड़हा राजा जकरियस तिड़ू, सचिव दानिएल मुण्डा, तिडू. संकुरा राजा बुधु मुण्डा, बड़े लाल कमल तिड़ू, माझी लाल लोदो मुण्डा, पुजारी सामु पाहन, भाजपा जिलाध्यक्ष आनन्द कुमार, अखिल भारतीय सरना समिति के अध्यक्ष भीम सिंह मुण्डा, प्रमुख छोटराम मुण्डा सहित अन्‍य उपस्थित थे।

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