पटना: बिहार विधानसभा ने मंगलवार को सिविल न्यायालय विधेयक 2026 सहित चार महत्वपूर्ण विधेयको को पारित कर दिया।
बिहार के संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन के सदस्यों से बिहार सिविल न्यायालय विधेयक 2026 पारित करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह विधेयक 1887 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बनाये गए कानून की जगह लेगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शसन काल में लागू यह कानून ‘बंगाल आगरा असम सिविल कोर्ट विधेयक 1887’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों और बदलते परिदृश्य को देखते हुए आज की आवश्यकताओं के अनुरूप बिहार सरकार ने नया कानून बनाने का निर्णय लिया है। सदन में बिहार तकनीकी सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 प्रस्तुत किया गया। इसके साथ बिहार कर्मचारी चयन आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 भी लाया गया।
बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 को भी चर्चा के बाद मंजूरी मिली। वहीं बिहार सिविल न्यायालय विधेयक 2026 सर्वसम्मति से पारित हुआ। चारों विधेयकों को क्रमवार पारित कर दिया गया।चर्चा के दौरान राजद विधायक राहुल कुमार ने चारों विधेयकों में संशोधन प्रस्ताव रखे। उन्होंने कुछ प्रावधानों में बदलाव की मांग करते हुए पुनर्विचार का आग्रह किया।
विपक्ष का कहना था कि इतने महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। हालांकि सदन ने सभी संशोधन प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। सरकार ने अपने बहुमत के दम पर विधेयकों को पारित कराया। सरकार की ओर से कहा गया कि संशोधन प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए हैं। मंत्री ने दावा किया कि नियुक्ति प्रक्रियाओं में तेजी आएगी।
स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। न्यायिक व्यवस्था को भी इन प्रावधानों से मजबूती मिलने की बात कही गई।
सरकार ने इसे सुधारात्मक पहल बताया। विपक्ष ने विधेयकों को जल्दबाजी में पारित करने पर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि पर्याप्त विमर्श का अवसर नहीं दिया गया। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया।
अंततः महज 24 मिनट में चारों अहम विधेयक पारित हो गए। सदन की इस त्वरित कार्यवाही ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
