रांची में गणगौर महोत्सव धूमधाम से संपन्न, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ पूजन

रांची। मारवाड़ी और राजस्थानी समाज की ओर से रांची में शनिवार को पारंपरिक गणगौर महोत्सव श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने अपने-अपने घरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता गणगौर की विधिवत पूजा-अर्चना की।

झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि गणगौर महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजस्थानी संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर देता है।

सुबह से ही महिलाओं में उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक राजस्थानी परिधानों लहंगा, ओढ़नी और आभूषणों से सुसज्जित होकर महिलाओं ने माता पार्वती और भगवान शिव के प्रतीक स्वरूप गणगौर प्रतिमाओं का श्रृंगार किया। घर-घर में मंगल गीत गूंजते रहे।

सुहागिन महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की, जबकि अविवाहित युवतियों ने मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए पूजा-अर्चना की।

संध्या समय शहर के विभिन्न तालाबों और जलाशयों के किनारे महिलाओं के समूह एकत्रित हुए, जहां लोकगीत और नृत्य के बीच गणगौर प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन किया गया। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल हुए।

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