सरकार 1932 आधारित स्थानीय नीति लागू करने के लिए प्रतिबद्ध : बिरूआ

रांची। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंत्री दीपक बिरुआ ने भू-राजस्व निबंधन और भूमि सुधार विभाग, कार्मिक प्रशासनिक सहित अन्य विभागों के अनुदान मांगों की कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के बाद सरकार की ओर से सदन में जवाब दिया। मंत्री ने कहा कि सरकार, 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए विधानसभा से पारित झारखंड स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा विधेयक-2022 को नौवीं अनुसूची में शामिल करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया गया है। नई नियुक्तियां होने तक बाह्य स्रोत से कर्मियों की सेवा ली जाएगी।

मंत्री ने कहा कि भूमि प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार नई नीतियां और डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। दाखिल-खारिज प्रक्रिया में सुधार के लिए सोमोटो सिस्टम और परिशोधन पोर्टल लागू किया गया है। पुराने खतियानों को समझने के लिए कैथी लिपि की पाठ्य पुस्तिका भी प्रकाशित की गई है। अंचल कार्यालयों और मुख्यालयों का आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कासवान भूमि के लिए नियमावली का गठन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि झारखंड संस्था निबंधन नियमावली भी गठित की गई है। मंत्री ने बताया कि राज्य में सेवाओं और पदों पर आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 77 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है। इसमें अनुसूचित जनजाति को 28 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 12 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग को 15 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग को 12 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। ट्रांसजेंडर समुदाय को भी ओबीसी सूची में शामिल किया गया है। सभी वर्गों की महिलाओं के लिए पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नियुक्तियों में तेजी आई है। वर्ष 2020 से 2025 के बीच जेएसएससी के माध्यम से 34 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हुई हैं, जबकि जेपीएससी के माध्यम से तीन हजार से अधिक पदों पर बहाली की गई है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग में 40 नए मोटर निरीक्षकों की नियुक्ति की गई है। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीमावर्ती इलाकों में चेक पोस्ट बनाने की योजना है। रांची में चिल्ड्रेन ट्रैफिक पार्क का निर्माण भी किया गया है, जिसका उद्घाटन जल्द होगा। इसके बाद स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो ने सदन में विपक्ष की ओर से लाए गए कटौती प्रस्ताव को अस्वीकृत करते हुए विभिन्न बजट के अनुदान मांगे स्वी्कृत कर दी। इसके साथ ही उन्होंने सदन की कार्यवाही 17 मार्च की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगीत कर दी।

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