झारखंड स्वास्थ्य सेवा में देश में तीसरे नंबर पर: मातृ मृत्यु दर को लेकर सरकार सख्त, 5 जिलों ने रिपोर्टिंग में किया कमाल

रांची। झारखंड ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ओर जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है, वहीं दूसरी ओर मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करने के लिए अब युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है। नेपाल हाउस स्थित मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत लेखा-जोखा पेश किया गया।

NQAS रैंकिंग: झारखंड ने रचा इतिहास
झारखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक’ (NQAS) प्रमाणन में राज्य को देश भर में तीसरा स्थान मिला है। मार्च 2025 में जहाँ केवल 8% स्वास्थ्य केंद्र प्रमाणित थे, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 56% हो गया है। सरकार ने दिसंबर 2026 तक राज्य के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को प्रमाणित करने का संकल्प लिया है।

रिपोर्टिंग में इन जिलों का रहा दबदबा
समीक्षा बैठक में जिलों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया, जिसमें डेटा रिपोर्टिंग को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए:
100% रिपोर्टिंग वाले जिले: खूंटी, लोहरदगा, रामगढ़, साहिबगंज और सिमडेगा।
लक्ष्य से आगे: बोकारो, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, रांची और पश्चिम सिंहभूम।
चेतावनी: बाकी जिलों की रिपोर्टिंग संतोषजनक नहीं है, जिन्हें तत्काल कार्यप्रणाली सुधारने का अल्टीमेटम दिया गया है।

मातृ मृत्यु के पीछे के 3 बड़े कारण
बैठक में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए कि आखिर किन वजहों से माताओं की जान जा रही है। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि हर मृत्यु की ‘वर्बल ऑटोप्सी’ (मौखिक जांच) अनिवार्य रूप से की जाए।

अस्पतालों के लिए ‘इंसेंटिव’ योजना
गुणवत्ता मानक प्राप्त करने वाले अस्पतालों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने बड़ी घोषणा की है:
प्रोत्साहन राशि: अस्पतालों को प्रति बेड 10,000 रुपये सालाना (3 साल तक) मिलेंगे।
बंटवारा: इस राशि का 25% हिस्सा अस्पताल के कर्मियों और अधिकारियों को पुरस्कार के रूप में दिया जाएगा।
विकास: शेष 75% राशि का उपयोग अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं और इलाज की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में होगा।

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