‘मिनी पाकिस्तान’ टिप्पणी पर राज्यसभा में गरमाई बहस, तृणमूल ने जताया कड़ा विरोध

नई दिल्ली : राज्यसभा में भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य के कोलकाता बंदरगाह के एक हिस्से पर अवैध कब्जे का मुद्दा उठाते हुए उसे “मिनी पाकिस्तान” कहने पर विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जतायी और सदन के बीचों-बीच आकर नारेबाजी की।

प्रश्नकाल शुरू होते ही श्री भट्टाचार्य ने बालागढ़ लॉजिस्टिक्स परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए अंग्रेजी में अपना पूरक प्रश्न पूछा। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर के बंगला भाषा में इसका जवाब देते हुए कहा कि यह परियोजना 900 एकड़ में होगी जिसमें कोलकाता के मौजूदा श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह की 300 एकड़ जमीन भी शामिल है। इसके लिए सड़क निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है और रेलवे लाइन के प्रस्ताव को भी पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है।

मंत्री ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से इस परियोजना के लिए सहयोग नहीं मिल रहा है।

दूसरा पूरक प्रश्न पूछते हुए श्री भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि कोलकाता में बंदरगाह की 170 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। शहर के कई इलाकों में यही हाल है और वहां के मेयर ने खुद गार्डेन रीच इलाके में अतिक्रमण की बात स्वीकार करते हुए उसे “मिनी पाकिस्तान” कहा था।

इस पर तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने विरोध शुरू कर दिया। श्री ठाकुर ने भाजपा सांसद की बात का समर्थन करते हुए कहा, “वहां की सरकार के लोगों ने सब जगह अतिक्रमण किया हुआ है।” उन्होंने बताया कि जलपत्तन प्राधिकरण ने अपनी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ केस भी किया हुआ है।

महाराष्ट्र से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की फौजिया खान और केरल से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास ने भी अपने प्रश्न पूछते समय “मिनी पाकिस्तान” को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।

जॉन ब्रिटास के प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री ठाकुर ने भी कहा कि कोलकाता के मेयर ने मीडिया के सामने उन इलाकों को “मिनी पाकिस्तान” कहा था।

मंत्री द्वारा यह बात दोहराने पर तृणमूल कांग्रेस के सदस्य ज्यादा उग्र हो गये। वे विरोध करते हुए सदन के बीचों-बीच आ गये और नारेबाजी करने लगे। सभापति ने उन्हें बार-बार ऐसा न करने की नसीहत दी और कहा कि यदि वे अपनी सीट पर वापस नहीं जायेंगे तो मजबूरन उन्हें कार्रवाई करनी होगी। इसके बात तृणमूल सांसदों का विरोध शांत हुआ।

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