पूर्वी सिंहभूम। बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। जिले के नए वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) एहतेशाम वकारिब ने पदभार संभालते ही बुधवार देर रात एडीजी मनोज कौशिक और विशेष जांच टीम (एसआईटी) के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर जांच की प्रगति का आकलन किया। बैठक में फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ हत्या की पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए नई रणनीति तैयार की गई।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरी साजिश का होगा खुलासा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अब केवल घटना में शामिल आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। जांच का दायरा बढ़ाते हुए पूरी साजिश, घटना की योजना और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है। नए एसएसपी के निर्देश पर तकनीकी साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वैज्ञानिक जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
सीसीटीवी फुटेज बनी जांच का सबसे बड़ा आधार
पुलिस ने 24 जून की रात करीब आठ बजे से रात 12 बजे तक बार परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली है। फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवाद की शुरुआत किसने की, सबसे पहले हथियार किसने निकाला, हिमांशु सिंह पर हमला किस क्रम में हुआ और घटना के समय वहां मौजूद लोगों की गतिविधियां क्या थीं। पुलिस का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है।
मुख्य आरोपी तक पहुंचने के लिए तकनीकी जांच तेज
जांच का एक अहम बिंदु मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा तक पहुंचना और यह पता लगाना है कि उसे घटनास्थल पर किसने बुलाया था। इसके लिए पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल टावर लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। बार के कर्मचारियों और संबंधित लोगों से भी लगातार पूछताछ की जा रही है। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सुनियोजित साजिश में सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बार कर्मचारियों और संचालक की भूमिका भी जांच के घेरे में
एसआईटी ने बार के मैनेजर, वेटर, बाउंसर, कैशियर और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जांच अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि विवाद किस टेबल से शुरू हुआ, उस समय कौन-कौन मौजूद था, बिल किसने चुकाया और घटना के दौरान कर्मचारियों ने क्या देखा। यदि किसी के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों में विरोधाभास मिलता है या तथ्य छिपाने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में बार संचालक नीरज सिंह की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या उन्हें बार के भीतर मौजूद हथियारबंद लोगों की जानकारी थी, क्या घटना के बाद किसी आरोपित को भागने में मदद मिली और क्या बार संचालन के दौरान लाइसेंस संबंधी नियमों का उल्लंघन हुआ था। सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की चूक की भी जांच की जा रही है।
फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों पर विशेष फोकस
फोरेंसिक टीम घटनास्थल से मिले खून के नमूनों, फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं तकनीकी शाखा मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर घटनास्थल पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की गतिविधियों का क्रम तैयार कर रही है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है और किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों से बचने और मामले से जुड़ी कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने पर पुलिस को उपलब्ध कराने की अपील की है।
