रांची। राजधानी के राज अस्पताल में इलाज के दौरान 18 वर्षीय युवक की मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर गठित जिला स्तरीय विशेष जांच टीम शनिवार को अस्पताल पहुंची और मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड तथा बिलिंग प्रक्रिया की जांच शुरू की। परियोजना पदाधिकारी मनीषा तिर्की के नेतृत्व में जांच दल ने अस्पताल प्रबंधन से आवश्यक अभिलेख जुटाए। जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
मौत के बाद 22 लाख के बिल पर उठा विवाद
जानकारी के अनुसार, लातेहार निवासी 18 वर्षीय राजू कुमार रंजन सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद करीब 40 दिन पहले राज अस्पताल में भर्ती हुआ था। इलाज के दौरान उसके पैर में संक्रमण हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण युवक की जान गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर 22 लाख रुपये का बिल थमा दिया। मामले को लेकर अस्पताल में हंगामा हुआ और परिजनों के आग्रह पर शव का पोस्टमार्टम रिम्स में कराया गया, ताकि मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों से किया इनकार
राज अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मरीज को 24 मई 2026 को गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद पॉलीट्रॉमा की स्थिति में भर्ती कराया गया था। उसके सिर, मस्तिष्क, गर्दन, रीढ़, फेफड़ों और पैर समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें थीं। अस्पताल के अनुसार मरीज का उपचार आईसीयू में वरिष्ठ न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की टीम की निगरानी में निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप किया गया। उपचार के दौरान वेंटिलेटर सपोर्ट, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, ऑपरेशन और डिब्राइडमेंट सहित सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाएं अपनाई गईं।
एम्प्यूटेशन की सलाह, परिजनों ने नहीं दी सहमति : अस्पताल
अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि मरीज के बाएं पैर में रक्त संचार पूरी तरह प्रभावित हो गया था और संक्रमण बढ़ने के कारण चिकित्सकों ने पिछले चार दिनों से कई बार पैर काटने (एम्प्यूटेशन) की सलाह दी थी, लेकिन परिजनों ने इसकी अनुमति नहीं दी। अस्पताल का कहना है कि यह तथ्य मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज है। प्रबंधन के अनुसार मरीज की मृत्यु दुर्घटना में लगी गंभीर चोटों और उससे उत्पन्न जटिलताओं के कारण हुई, न कि किसी चिकित्सकीय लापरवाही से।
जांच में सहयोग का दावा
अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि उपचार के दौरान परिजनों द्वारा अस्पताल परिसर में हंगामा और विरोध-प्रदर्शन किए जाने से कुछ समय के लिए सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, लेकिन मरीज के इलाज में कोई कमी नहीं आने दी गई। प्रबंधन ने यह भी बताया कि सरकारी जांच टीम को सभी आवश्यक दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य तथ्य उपलब्ध करा दिए गए हैं तथा निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।
