पानी शरीर के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए रोजाना 8 गिलास या 2 लीटर पानी पीने का नियम सही नहीं है। शरीर को कितने पानी की जरूरत है, यह उम्र, शारीरिक गतिविधि, मौसम और स्वास्थ्य जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। कम समय में जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है।
कितना पानी पीना चाहिए?
नेशनल अकादमी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, रोजाना पानी की जरूरत व्यक्ति की उम्र और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग होती है। 19 साल से अधिक उम्र के पुरुषों के लिए कुल पानी की जरूरत करीब 3.07 लीटर और महिलाओं के लिए करीब 2.12 लीटर बताई गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह मात्रा करीब 2.36 लीटर और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए करीब 3.07 लीटर हो सकती है।
ध्यान रखें कि यह कुल पानी का सेवन है, जिसमें सादा पानी के साथ दूध, सूप, अन्य पेय पदार्थ और फल-सब्जियों से मिलने वाला पानी भी शामिल होता है।
पानी पीने का सही तरीका क्या है?
प्यास लगना शरीर की तरल पदार्थ की जरूरत का एक संकेत है। सामान्य स्वस्थ वयस्कों को प्यास के अनुसार पानी पीना चाहिए। हालांकि बुजुर्गों, छोटे बच्चों, खिलाड़ियों और कुछ बीमारियों से जूझ रहे लोगों में प्यास का एहसास कम हो सकता है। ऐसे लोगों को नियमित अंतराल पर तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए।
एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर माना जाता है। गर्मी, व्यायाम या अधिक पसीना आने की स्थिति में शरीर को सामान्य से ज्यादा तरल पदार्थ की जरूरत हो सकती है। ऐसे समय में पानी के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत भी पड़ सकती है।
यूरिन का हल्का पीला रंग सामान्य हाइड्रेशन का संकेत हो सकता है, लेकिन केवल यूरिन के रंग के आधार पर शरीर में पानी की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। कुछ दवाइयां और विटामिन भी इसका रंग बदल सकते हैं।
पानी पीते समय इन गलतियों से बचें
कम समय में बहुत ज्यादा पानी पीने से शरीर में सोडियम का स्तर कम हो सकता है। इसे हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है और गंभीर स्थिति में यह खतरनाक हो सकता है। इसलिए थोड़े समय में कई लीटर पानी पीने से बचना चाहिए।
इसी तरह 8 गिलास पानी को सभी लोगों के लिए अनिवार्य मानना भी सही नहीं है। मीठे पेय, शीतल पेय या अधिक चीनी वाले पेय पदार्थों को पानी का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। फल और सब्जियां भी शरीर को पानी उपलब्ध कराते हैं, लेकिन केवल इन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
अगर बार-बार बहुत ज्यादा प्यास लगती है, मुंह सूखता है, चक्कर आते हैं, थकान रहती है या यूरिन का रंग लगातार गहरा रहता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं, किडनी, हृदय या लिवर से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही रोजाना पानी की मात्रा तय करनी चाहिए।


