रांची। जोन्हा फॉल के निकट मसरीजारा से हेसलाबेड़ा तक कच्ची सड़क को पक्कीकरण कराने के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय में गुरुवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने प्रस्तावित सड़क का विस्तृत लेआउट प्लान प्रस्तुत नहीं करने पर राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई।
अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि जिम्मेदार एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को अदालत जुर्माना भी लगा सकता है। लेकिन अदालत ऐसा कड़ा आदेश पारित नहीं करना चाहता। सरकार एक सप्ताह में प्रस्तावित सड़क का विस्तृत लेआउट प्लान बनाए और उसे रेलवे को अनुमोदन के लिए भेजे। इस मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी।
दरअसल, खंडपीठ ने पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह प्रस्तावित सड़क का विस्तृत लेआउट प्लान दो सप्ताह के भीतर तैयार कर रेलवे अधिकारियों को अनुमोदन के लिए भेजे। वहीं, रेलवे प्रशासन को भी निर्देश दिया गया था कि लेआउट प्लान प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र ( एनओसी) जारी करने पर निर्णय ले।
खंडपीठ ने सुझाव दिया था कि उक्त सड़क की चौड़ाई कम-से-कम 8 मीटर रखी जाए, ताकि दो वाहन आसानी से एक-दूसरे को पार कर सकें। खंडपीठ ने यह भी कहा था कि संबंधित क्षेत्र में कई पर्यटन स्थल हैं, ऐसे में मात्र 5 मीटर चौड़ी सड़क भविष्य में यातायात जाम की समस्या पैदा कर सकती है।
मामले में पक्षकारों ने 5 मीटर चौड़ी सड़क का प्रस्ताव रखा था। बताया गया था कि रेलवे अधिकारियों ने अपनी भूमि पर 5 से 6 मीटर चौड़ी सड़क निर्माण की सहमति दी है। खंडपीठ ने निर्देश दिया था कि शेष चौड़ाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अपनी भूमि उपलब्ध कराए, ताकि सड़क की कुल चौड़ाई कम-से-कम 8 मीटर हो सके। साथ ही, रेलवे सीमा से बाहर पड़ने वाले हिस्सों के लिए भी राज्य सरकार को अपनी भूमि का उपयोग करना होगा।
