ईरान–अमेरिका–इजराइल तनाव के कारण हुई रसोई गैस की किल्लत

खूंटी। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब गांव–देहात तक दिखाई देने लगा है। जिला मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों घरेलू रसोई गैस की भारी किल्लत हो गई है। गैस सिलेंडर नहीं मिलने से आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से गैस आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। इसका असर यह हुआ कि गैस एजेंसियों में सिलेंडर की उपलब्धता कम हो गई है। स्थिति यह है कि लोग खाली सिलेंडर लेकर एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी तक चक्कर लगाने को विवश हैं, लेकिन कई जगहों पर उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि पहले जहां आसानी से गैस सिलेंडर मिल जाता था, वहीं अब कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि एजेंसियों पर लंबी कतारें लग रही हैं और कई बार स्टॉक खत्म होने की बात कहकर लोगों को लौटा दिया जा रहा है। इससे खासकर ग्रामीण महिलाओं की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें खाना बनाने में दिक्कत हो रही है।

इधर, युद्ध शुरू होने के साथ ही घरेलू रसोई गैस की कीमत में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी भी हो चुकी है। कीमत बढ़ने और सिलेंडर की कमी से आम उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ रही है। बढ़ती महंगाई के बीच गैस की कीमतों में वृद्धि ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस की आपूर्ति व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। साथ ही एजेंसियों पर पर्याप्त मात्रा में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है, जिससे ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

रसोई गैस की किल्लत के संबंध में एजेंसी का कहना है कि आपूर्ति बंद नहीं हुई है, इसमें कमी जरूर आई है।

इस सम्बन्ध में खूंटी प्रखंड की पूर्व प्रमुख रुकमिला सारू ने कहा कि गैस की कमी न हो, प्रशासन की विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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