नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में शिक्षा में प्रयोग आधारित सीख के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने “करत-करत अभ्यास के, जड़मत होत सुजान” कहावत का जिक्र करते हुये कहा कि निरंतर अभ्यास से ही ज्ञान और समझ बढ़ती है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि छात्र सबसे बेहतर तब सीखते हैं, जब वे किसी विषय में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और खुद प्रयोग करके समझते हैं।
श्री मोदी ने बेंगलुरु में चल रही एक अनूठी पहल का जिक्र किया, जहां ‘प्रयोग शिक्षा अनुसंधान संस्थान’ की टीम स्कूल स्तर पर विज्ञान शिक्षा को लोकप्रिय बनाने का कार्य कर रही है। इस टीम द्वारा शुरू किए गए ‘अन्वेषण’ कार्यक्रम के तहत 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को केमिस्ट्री, अर्थ साइंस और वेलनेस जैसे विषयों में नवाचार और रिसर्च करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से छात्रों को न केवल अनुसंधान का व्यावहारिक अनुभव मिलता है, बल्कि उन्हें अपने प्रोजेक्ट्स को प्रकाशित करने का मंच भी उपलब्ध होता है।
श्री मोदी ने कहा कि परीक्षा पर चर्चा के दौरान कई छात्रों ने विज्ञान पढ़ने की इच्छा जताई, लेकिन साथ ही डर भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘अन्वेषण’ जैसी पहलें छात्रों को विज्ञान से जोड़ने और उसे आसान व रोचक बनाने में मदद करती हैं। जब छात्र खुद प्रयोग करते हैं, तो उनमें जिज्ञासा और रुचि दोनों बढ़ती हैं।
श्री मोदी ने विश्वास जताया कि ऐसे प्रयासों से देश में नई पीढ़ी के वैज्ञानिक तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल नहीं कि आज के यह छात्र ही भविष्य में देश और दुनिया के बेहतरीन वैज्ञानिक बन सकते हैं।
