भारत नेपाल सीमावर्ती शहर जोगबनी के पांच सौ से अधिक लोग खाड़ी देशों में युद्ध के बीच हैं फंसे,परिजन मांग रहे हैं सलामती की दुआ

पटना /अररिया। भारत नेपाल सीमावर्ती शहर जोगबनी से पांच सौ से अधिक युवक दुबई,रियाद, इसराइल,बहरीन,कतर,संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन आदि शहरों में ईरान,इजराइल और अमेरिका के युद्ध में फंसे हुए है।

पश्चिम एशिया में ताबड़तोड़ हमलों के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं।जिसको लेकर खाड़ी देशों में फंसे परिजन की सुरक्षा को लेकर घरवालों को चिंता सताने लगी है।

जोगबनी के घुसकी पट्टी,रहमानगंज के कई ऐसा परिवार है,जहां के सारे मर्द काम के लिए गए थे और हालात बिगड़ने के बाद इन देशों में फंसे हैं।अधिकांश लोग एक समुदाय से हैं और वे दर्जी, बढ़ई और अन्य दिहाड़ी मजदूरी वाला काम वहां करते हैं।अधिकांश प्रवासी कामगार ईद के मौके पर घर आने वाले थे,लेकिन हालात बिगड़ने के बाद एयरपोर्ट से उड़ान रद्द हो जाने के कारण फंस गए हैं।

परिजन मोबाइल पर फंसे परिजनों का खैरियत लेते रहते हैं और घर में परिजनों की सलामती को लेकर दुआ करते हैं।परिजनों ने बताया कि खाड़ी देशों में फंसे मजदूरों को वहां की सरकार ने एडवाइजरी जारी की हुई है और निकटवर्ती बंकर की सूचना दे दी गई है।

एडवाइजरी के अनुसार रहने के सख्त हिदायत है। खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों के सही सलामत वतन वापसी के लिए परिजन सरकार से पहल करने की मांग कर रहे हैं।परिजनों को भारत सरकार पर भरोसा है कि सरकार फंसे भारतीयों के सही सलामत वापसी के लिए सकारात्मक पहल करेगी।

दुबई में रह रहे मोहम्मद तालिब ने व्हाट्सएप के जरिए बताया कि हमले के बाद कंपनियों ने छुट्टी दे दी है और सभी प्रवासियों को कमरों में बंद रहने का निर्देश दिया गया है।सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है और निकटवर्ती बंकर में सुरक्षित जाने का निर्देश दिया है।धमाकों की आवाज लगातार सुनाई दे रही है।जोगबनी, फारबिसगंज, अररिया, सुपौल और छातापुर के दो दर्जन से अधिक साथी एक हॉल में साथ रह रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट की है। तालिब के अनुसार रोजा खोलने के समय दो घंटे के लिए ही इंटरनेट मिलता है, क्योंकि दुबई भारत से दो घंटे पीछे है। इंटरनेट कटते ही घरवालों से संपर्क टूट जाता है। बीच बीच में इंटरनेट सेवा मिलती है मगर कब बंद हो जाय पता नहीं। रियाद में फंसे मो.अंजार ने बताया कि कामकाज पूरी तरह ठप है और कई जगह कर्फ्यू लगा है। हमें घर में रहने को कहा गया है। इंटरनेट अधिकतर समय नहीं रहता।

जोगबनी के घुसकीपट्टी,रहमानगंज,रामपुर दक्षिण, रामपुर उत्तर और कूढ़ेली सहित अन्य गांवों में परिजन झुंड बनाकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल से अपनों की सलामती जान रहे हैं। खाड़ी में बिगड़ते हालात का असर यहां परिवारों की बढ़ती धड़कनों में साफ दिख रहा है और परिजन की सलामती के लिए दुआ मांग रहे हैं।

जोगबनी के राव साहेब खान ने बताया कि जोगबनी के पांच सौ से अधिक युवक खाड़ी देशों में काम करते हैं।प्रायः ये लोग ईद पर्व पर घर आते हैं,लेकिन इस बार बिगड़े हालात को लेकर सबसे बड़ी चिंता परिजनों को उनके सुरक्षित रहने को लेकर है।वहीं जोगबनी के ही परवेज आलम ने बताया कि उनके भाई और परिजन दुबई और रियाद में हैं,जिनसे बात हुई है और सभी एक हॉल में हैं।सरकार की ओर से मोबाइल पर अलर्ट जारी किया हुआ है।कहां जाना है और कैसे जाना है सहित बंकर के बारे में जानकारी दी गई है।उन्होंने भारत सरकार पर भरोसा जताया कि उड़ान शुरू होने के साथ ही परिजनों को सुरक्षित उनके वतन को लाने को लेकर सकारात्मक पहल करेंगे। बुजुर्ग महिला नुसरत ने बताया कि उनका बेटा और दामाद कुल पांच लोग रियाद में हैं और उन्हें उनलोगों की सलामती को लेकर काफी चिंता सता रही है।

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