तेल अवीव : इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि केवल हवाई हमलों से ईरान के शासन को नहीं उखाड़ा जा सकता, बल्कि इसके लिए एक ‘ज़मीनी कार्रवाई’ की आवश्यकता होगी।
श्री नेतन्याहू ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इजरायल और अमेरिका हवाई हमलों से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट कर रहे हैं, लेकिन सार्थक सत्ता परिवर्तन केवल हवाई अभियानों से संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “क्रांति केवल हवा से नहीं आ सकती, इसके लिए ज़मीनी कार्रवाई भी जरूरी है।” उन्होंने यह साझा करने से इनकार कर दिया कि इस ‘ज़मीनी कार्रवाई’ का स्वरूप क्या होगा।
इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान में केवल शासन बदलना काफी नहीं है, बल्कि वहां की विचारधारा में बदलाव आना जरूरी है। उन्होंने इसकी तुलना इतिहास से करते हुए कहा, “आप एक तानाशाह (अयातुल्लाह) को हटाकर दूसरे को नहीं लाना चाहेंगे। आप हिटलर की जगह दूसरे हिटलर को नहीं बिठाना चाहेंगे।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल और अमेरिका हवाई हमलों के जरिए केवल ‘स्थितियां’ पैदा कर सकते हैं, लेकिन वास्तविक क्रांति और सत्ता का तख्तापलट केवल ‘ज़मीनी स्तर’ पर ईरानी जनता के प्रयासों और सक्रियता से ही संभव है।
श्री नेतन्याहू ने यह भी कहा कि सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु के बाद शासन के भीतर काफी तनाव और दरारें हैं। उन्होंने उनके संभावित उत्तराधिकारी मुज्तबा खामेनेई पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अभी तक सामने नहीं आए हैं, जो शासन की कमजोरी को दर्शाता है।
अभियान के 20वें दिन श्री नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान अब यूरेनियम संवर्धन करने और बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता खो चुका है। उन्होंने कहा, “हम इन क्षमताओं को धूल और राख में मिलाना जारी रखेंगे। ईरान आज पहले से कहीं ज्यादा कमजोर है, जबकि इजरायल एक क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है।”
उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ के तहत इजरायल अब उन कारखानों को निशाना बना रहा है जो मिसाइलों के पुर्जे बनाते हैं, ताकि ईरान के औद्योगिक आधार को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मतभेदों की खबरों पर श्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल ने अकेले कार्रवाई की थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के अनुरोध पर भविष्य के कुछ हमलों को फिलहाल रोक दिया गया है।
उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया कि उन्होंने अमेरिका को इस युद्ध में धकेला है। साथ ही, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील रास्तों के विकल्प के रूप में अरब प्रायद्वीप से भूमध्यसागरीय बंदरगाहों तक पाइपलाइन बिछाने का सुझाव दिया।
नेतन्याहू के इस संबोधन के कुछ ही घंटों बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर नए मिसाइल हमले किए, जिससे यरूशलम और इजरायल के अन्य हिस्सों में हवाई हमले के सायरन बजने लगे
