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वायु प्रदूषण से सिर्फ फेफड़ों का कैंसर नहीं, लाखों कैंसर मामलों का संबंध

वायु प्रदूषण को आमतौर पर खांसी, सांस लेने में परेशानी और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है, लेकिन एक नई वैश्विक स्टडी ने इसके प्रभाव को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखी है। शोध के अनुसार, लंबे समय तक वायु प्रदूषण, खासकर पीएम2.5 जैसे बेहद महीन कणों के संपर्क में रहने का संबंध दुनिया भर में लाखों कैंसर मामलों से पाया गया है। अध्ययन में फेफड़ों के कैंसर के अलावा कई अन्य प्रकार के कैंसर के साथ भी प्रदूषण के संबंध के संकेत मिले हैं।

क्या है पीएम2.5 और शरीर पर कैसे करता है असर?

पीएम2.5 हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे बेहद महीन कण होते हैं। इनका आकार इंसानी बाल की मोटाई की तुलना में कई गुना कम होता है। बेहद छोटे होने के कारण ये सांस के जरिए शरीर के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और कोशिकाओं पर अन्य प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।

वैज्ञानिक शोध में पीएम2.5 के संपर्क को फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ पेट, लिवर, ब्लैडर और कोलोरेक्टल कैंसर जैसे कुछ अन्य कैंसर के जोखिम से भी जोड़ा गया है। हालांकि, प्रदूषण के संपर्क में आने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को निश्चित रूप से कैंसर होगा।

20 साल के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण

‘नेचर हेल्थ’ में प्रकाशित इस अध्ययन में वर्ष 2000 से 2020 के बीच 952 स्थानों से कैंसर और वायु प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें कुल 10.9 करोड़ कैंसर मामलों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने पीएम2.5 के अलावा ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के प्रभाव का भी अध्ययन किया।

अध्ययन के अनुमान के मुताबिक, 20 वर्षों की अवधि में पीएम2.5 के संपर्क से करीब 88.2 लाख कैंसर मामलों का संबंध पाया गया। वहीं नाइट्रोजन डाइऑक्साइड करीब 66.7 लाख और ओजोन लगभग 25.9 लाख मामलों से जुड़ा पाया गया।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने अध्ययन की कुछ सीमाओं का भी उल्लेख किया है। प्रदूषण के संपर्क का अनुमान बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय और उपग्रह आधारित आंकड़ों से लगाया गया। वहीं धूम्रपान, खान-पान, कामकाजी परिस्थितियों, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जीवनशैली जैसे कैंसर के अन्य जोखिम कारकों को पूरी तरह अलग कर पाना संभव नहीं था।

कई प्रकार के कैंसर से मिला संबंध

अध्ययन में लंबे समय तक पीएम2.5 के संपर्क और कई प्रकार के कैंसर के बीच संबंध के संकेत मिले। इनमें थायरॉइड, स्तन, प्रोस्टेट, कोलन और रेक्टम, ओवरी, टेस्टिस, किडनी, ब्लैडर और अग्न्याशय के कैंसर शामिल हैं। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के संपर्क का संबंध लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसे कैंसर से भी देखा गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रदूषित हवा लंबे समय में शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, डीएनए को नुकसान और प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव जैसी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि वायु प्रदूषण के प्रभाव को केवल श्वसन तंत्र तक सीमित करके देखना पर्याप्त नहीं है।

किडनी और ब्लैडर कैंसर के जोखिम में बढ़ोतरी

अध्ययन में पीएम2.5 के स्तर और किडनी तथा ब्लैडर कैंसर के बीच विशेष रूप से उल्लेखनीय संबंध सामने आया। शोधकर्ताओं के अनुमान के अनुसार, पीएम2.5 के स्तर में प्रति घन मीटर 10 माइक्रोग्राम की वृद्धि किडनी कैंसर के जोखिम में 17.9 प्रतिशत और ब्लैडर कैंसर के जोखिम में 21.1 प्रतिशत वृद्धि से जुड़ी थी।

महिलाओं पर अधिक असर के संकेत

शोध में यह भी पाया गया कि कुछ प्रदूषण से जुड़े कैंसर के मामलों में महिलाओं पर प्रभाव पुरुषों की तुलना में अधिक हो सकता है। यह अंतर विशेष रूप से पाचन और श्वसन तंत्र से जुड़े कैंसर तथा हार्मोन से संबंधित स्तन कैंसर के मामलों में देखा गया।

अध्ययन के अनुसार, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के स्तर में प्रति घन मीटर 10 माइक्रोग्राम की वृद्धि महिलाओं में स्तन कैंसर के करीब 20 प्रतिशत अधिक जोखिम से जुड़ी थी। शोधकर्ताओं ने इसके पीछे संभावित जैविक प्रक्रियाओं के रूप में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, डीएनए क्षति और प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव जैसे कारकों की ओर संकेत किया है।

साफ हवा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी

विश्व स्तर पर वायु गुणवत्ता में काफी अंतर है, लेकिन बड़ी आबादी अभी भी ऐसे वातावरण में रहती है जहां प्रदूषण का स्तर स्वास्थ्य संबंधी अनुशंसित सीमाओं से अधिक है। कम और मध्यम आय वाले देशों में इसका प्रभाव विशेष रूप से गंभीर हो सकता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल और अन्य महीन कण वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अध्ययन के निष्कर्ष बेहतर वायु गुणवत्ता नीतियां बनाने और प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य बोझ को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, अध्ययन को इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि वायु प्रदूषण हर कैंसर के मामले के लिए जिम्मेदार है। यह मुख्य रूप से आबादी के स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क और कैंसर के बोझ के बीच संबंध का अनुमान प्रस्तुत करता है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध वैज्ञानिक शोध के आधार पर तैयार की गई है और इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी चिंता या व्यक्तिगत जोखिम के आकलन के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लें।

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