नई दिल्ली। पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे पर्याप्त कदम नहीं बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सरकार ने देश के युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को बिगड़ने दिया और इसके जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें हैं— शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों से माफी मांगी जाए और छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
केजरीवाल बोले- कार्रवाई हो, सिर्फ अदालत नहीं
अरविंद केजरीवाल ने भी फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पेपर लीक गिरोह और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले से कई मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें बनी हुई हैं, लेकिन उनमें भी सुनवाई समय पर नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे या भविष्य में पेपर लीक रोकने की ठोस व्यवस्था पर कोई घोषणा क्यों नहीं की।
छात्रों पर कार्रवाई का भी उठाया मुद्दा
केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है और छात्रों की चिंताओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
विपक्ष ने सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाने की मांग दोहराई।


