भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर दोनों देशों की ओर से शनिवार को एक संयुक्त बयान घोषित कर दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह समझौता भारत में कृषि, मत्स्य,सूक्ष्म लघु और मझोले उद्योग तथा अन्य श्रम गहन क्षेत्रों में रोजगार के विशाल अवसर उत्पन्न करेगा तथा इससे दोनों देशों के बीच उच्च पद प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा।
श्री मोदी ने दोनों देशों के बीच हुई सहमति को भारत और अमेरिका के आपसी संबंधों की मजबूती के प्रति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिबद्धता बताया है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लिए हुई सहमति पर एक विज्ञप्ति में कहा है,” अमेरिका और भारत यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हैं कि वे पारस्परिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते (अंतरिम समझौता) के ढांचे पर सहमत हो गए हैं।”

आज के समझौते की यह रूपरेखा 13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए व्यापक अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ता के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जिसमें बाजार में प्रवेश को और आसान बनाने की प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी और अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन मिलेगा। ”

विज्ञप्ति में कहा गया है कि अमेरिका और भारत के बीच यह अंतरिम समझौता हमारे देशों की साझेदारी में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा, जो पारस्परिक हितों और ठोस परिणामों पर आधारित पारस्परिक और संतुलित व्यापार के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तों के बारे में संयुक्त बयान में कहा गया है कि यहसमझौता दोनों देशों के सभी औद्योगिक सामानों और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्कों को समाप्त या कम करेगा, जिसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (डीडीजी), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।

इसके तहत भारत के साथ व्यापार के बारे में अमेरिका के 2 अप्रैल, 2025 के सरकारी आदेश को संशोधित किया गया है।
इन संशोधनों के अनुसार भारत में निर्मित वस्तुओं पर अमेरिका में 18 प्रतिशत की परस्पर अनुवर्ती दर से शुल्क लागू होंगे लागू होंगे ।
इस शुल्क के तहत आने वाली वस्तुओं में वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, घरेलू सजावट, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं।

अंतरिम समझौते के सफलता पूर्वक संपन्न होने पर अमेरिका पिछले साल 5 सितंबर को जारी आदेश को संशोधित करेगा। अमेरिका पिछले साल सितंबर में प्रशुल्क समायोजन संबंधी अपने आदेश में शामिल वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर जवाबी शुल्क हटा देगा। इन वस्तुओं में जेनेरिक दवाएं , रत्न और हीरे और विमान के पुर्जे शामिल हैं।

अमेरिका, भारत के कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए उन शुल्कों को भी हटा देगा जो 8 मार्च, 2018 और 30 जुलाई, 2025 के आदेशों में उल्लिखित राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों को समाप्त करने के लिए लगाए गए थे। इसी प्रकार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को उन ऑटोमोबाइल पुर्जों के निर्यात के लिए लिए शुल्क दर आधारित कोटा प्राप्त होगा जिन पर 17 मई, 2019 के आदेश और उसके बाद संशोधित आदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों को समाप्त करने के लिए शुल्क लागू लागू था।

अंतरिम समझौते के तहत फार्मास्यूटिकल्स और फार्मास्युटिकल अवयवों की अमेरिकी धारा 232 जांच के निष्कर्षों के आधार पर, भारत को जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स और अवयवों के संबंध में बातचीत के माध्यम से समाधान निकल जाएंगे ।

विज्ञप्ति के अनुसार दोनों देश एक दूसरे को अपने-अपने हित के क्षेत्रों में निरंतर आधार पर तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अमेरिका और भारत ऐसे उत्पत्ति नियम स्थापित करेंगे जो यह सुनिश्चित करेंगे कि समझौते के लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही प्राप्त हों।

अमेरिका और भारत द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर- प्रशुल्कीय की बाधाओं का समाधान करेंगे।

संयुक्त वक्तव्य केअनुसार भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने; अमेरिकी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच में देरी करने या उन पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाने वाली प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने; और समझौते के लागू होने के छह महीने के भीतर, सकारात्मक परिणाम की दिशा में, यह निर्धारित करने पर सहमत है कि क्या अमेरिकी-विकसित या अंतर्राष्ट्रीय मानक, जिनमें परीक्षण आवश्यकताएं भी शामिल हैं, भारतीय बाजार में प्रवेश करने वाले अमेरिकी निर्यात के लिए चिन्हित क्षेत्रों में स्वीकार्य हैं।

दोनों देशों केबीच लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करने के लिए मिलकर काम करने के महत्व को समझते हुए, भारत अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही गैर प्रशुल्कीय के इधर बाधाओं को दूर करने पर भी सहमत है।

व्यापार को लेकर लागू तकनीकी विनियमों के अनुपालन को सुगम बनाने के उद्देश्य से, दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से सहमत क्षेत्रों के लिए अपने-अपने मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे।

किसी भी देश द्वारा निर्धारित शुल्क में किसी भी प्रकार के परिवर्तन की स्थिति में, दोनों पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकते हैं।
वक्तव्य के अनुसार अमेरिका और भारत व्यापार समझौता ज्ञापन (बीटीए) की वार्ता के माध्यम से बाजार पहुंच के अवसरों को और अधिक विस्तारित करने की दिशा में काम करेंगे।

वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है,”अमेरिका इस बात की पुष्टि करता है कि वह बीटीए की वार्ता के दौरान भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के लिए भारत के इस अनुरोध को ध्यान में रखेगा।”

अमेरिका और भारत आर्थिक सुरक्षा संरेखण को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला की लचीलता और नवाचार को बढ़ाया जा सके। इसके लिए तीसरे पक्ष की गैर-बाजार नीतियों से निपटने के लिए पूरक कार्रवाई की जाएगी, साथ ही साथ आंतरिक और बाहरी निवेश समीक्षाओं और निर्यात नियंत्रणों पर सहयोग किया जाएगा।

भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के पुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा रखता है।

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