पारंपरिक और आधुनिक पद्धतियों के संयोजन से चिकित्सा विज्ञान को नयी दिशा दे रहा है पतंजलि संस्थान

हरिद्वार ;बीमारी को जड़ से समाप्त करने की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की क्षमताओं और मरीज को तुरंत राहत देने की आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की दक्षता के बीच चयन की रोगियों की दुविधा को दूर करने के लिए पतंजलि संस्थान एकीकृत चिकित्सा पद्धति की शुरुआत कर चिकित्सा विज्ञान को एक नयी दिशा दे रहा है।

हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ के पतंजलि इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल में इस एकीकृत चिकित्सा पद्धति का प्रयोग किया जा रहा है। अस्पताल में चौबीसों घंटे आपात चिकित्सा सुविधा, अत्याधुनिक आईसीयू, रोग निदान, ऑपरेशन थियेटर आदि की व्यवस्था है। अस्पताल में हृदय रोग, बाल रोग और न्यूरोसर्जरी जैसे विभाग भी हैं। इस विशिष्ट एवं अत्याधुनिक अस्पात का इसी साल 22 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने औपचारिक रूप से उद्घाटन किया था।

अस्पताल में भ्रमण और चिकित्सकों और देश भर से यहां आने वाले रोगियों की बात चीत से प्रकट रूप से यह बात दिखी कि आयुर्वेद और योग के साथ आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का संयुक्त एवं संतुलित प्रयोग उन मरीजों के लिए काफी मददगार है जो आयुर्वेदिक उपचार के लिए योगपीठ में आते हैं लेकिन उन्हें बीच में तुरंत राहत उपलब्ध कराने की जरूरत होती है जिसके बिना उन्हें खतरा हो सकता है।

इस अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक और आईसीयू की विभागाध्यक्ष डॉ श्वेता जायसवाल ने बताया कि उनके ठीक बगल में स्थित पातंजलि समूह के आयुर्वेदिक अस्पताल में जो मरीज आते हैं और जिन्हें कुछ आपातकालीन चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है उन्हें एलोपैथिक चिकित्सा के लिए इस अस्पताल में भेजा जाता है। उनकी स्थिति संभल जाने के बाद वे फिर आयुर्वेदिक अस्पताल में जा कर उपचार जारी रखते हैं।

डॉ. जायसवाल ने बताया कि कई मामलों में एलोपैथिक इलाज के दौरान भी मरीजों को वैद्य के परामर्श से उनकी आयुर्वेदिक दवाइयां जारी रखी जाती हैं।

उन्होंने कहा कि एकीकृत चिकित्सा प्रणाली के बारे में इससे पहले कोई व्यवस्थित वैज्ञानिक शोध नहीं हुआ है, पर अब इस अस्पताल में इस पर शोध किया जा रहा है। हर मरीज के आयुर्वेदिक उपचार और एलोपैथिक उपचार का पूरा रिकॉर्ड रखा जा रहा है – पतंजलि में आने से पहले मरीज की स्थिति क्या थी, उसका कैसा इलाज चल रहा था, यहां कौन सी दवाएं दी गयीं और उनका क्या असर हुआ। इसकी तुलना सिर्फ एलोपैथी में इलाज कराने वाले मरीजों के आंकड़ों से की जायेगी।

उन्होंने कहा कि किसी भी दूसरे अध्ययन की तरह इस अध्ययन में भी समय लगेगा, लेकिन एक बार जब बहुत सारा डाटा आ जायेगा तो एकीकृत चिकित्सा के गुण-दोषों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

महाराष्ट्र के गणेश काडू की किडनी खराब हो रही है वह आयुर्वेदिक इलाज के लिए यहां पतंजलि के केंद्र में आये थे। बारह दिन तक आयुर्वेदिक इलाज चला। इस दौरान डायलिस बंद थी। बीच में उन्हें जरूरत दिखने पर एलोपैथिक अस्पताल में भी भर्ती कराया गया। उन्होंने कहा कि यहां के डॉक्टर काफी अच्छे हैं और अब मरीज की हालत स्थिर है।

पतंजलि योगपीठ के एक अधिकारी ने बताया कि यह प्रणाली केवल बीमारी पर ही केंद्रित नहीं है, बल्कि हर इंसान को एक अलग इकाई मानते हुए उसके शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक पक्ष पर फोकस करती है। उपचार योजना इस प्रकार तैयार की जाती है कि वह रोगी की आवश्यकताओं के अनुसार हो, न कि किसी रूढ़ तौर-तरीके या पहले से तय उपचार पद्धति के अनुसार।

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