हजारीबाग ‘नरबलि’ कांड पर सियासी संग्राम: भाजपा का पलटवार, कहा- आरोपी भीमराम से हमारा कोई नाता नहीं

रांची : हजारीबाग के विष्णुगढ़ में चैत्र नवरात्र के दौरान हुई 13 वर्षीय बच्ची की कथित ‘नरबलि’ की वीभत्स घटना ने अब राजनीतिक रणक्षेत्र का रूप ले लिया है। इस मामले के मुख्य आरोपी भीमराम के जुड़ाव को लेकर सत्ताधारी दल जेएमएम (JMM) और मुख्य विपक्षी दल भाजपा (BJP) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

जेएमएम के आरोपों पर आदित्य साहू का तीखा जवाब
झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर झारखंड मुक्ति मोर्चा के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। गौरतलब है कि जेएमएम महासचिव विनोद पांडे ने दावा किया था कि आरोपी भीमराम भाजपा का बूथ अध्यक्ष है और एससी-एसटी प्रकोष्ठ में सक्रिय है।

इन दावों को खारिज करते हुए साहू ने कहा “भीमराम का भारतीय जनता पार्टी से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। सत्ता पक्ष अपनी प्रशासनिक विफलताओं को ढंकने के लिए भाजपा पर अनर्गल आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर रहा है।”

वापस लिया गया ‘झारखंड बंद’ का आह्वान
आरोपी की गिरफ्तारी और पुलिसिया कार्रवाई के बाद भाजपा ने अपने विरोध प्रदर्शनों के कार्यक्रम में बदलाव किया है। आदित्य साहू ने जानकारी दी कि 3 अप्रैल को होने वाला मशाल जुलूस रद्द कर दिया गया है। 9 अप्रैल को प्रस्तावित ‘झारखंड बंद’ के आह्वान को वापस ले लिया गया है।

साहू ने इसका श्रेय पार्टी के कार्यकर्ताओं को देते हुए कहा कि भाजपा के निरंतर दबाव के कारण ही पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा करने में तत्परता दिखाई।

पुलिस की ‘थ्योरी’ पर संदेह और न्यायिक जांच की मांग
भाजपा ने पुलिस द्वारा दी गई ‘नरबलि’ की थ्योरी पर भी सवाल खड़े किए हैं। आदित्य साहू ने तर्क दिया कि “आमतौर पर बलि की प्रक्रियाओं में पत्थर मारकर हत्या नहीं की जाती। पुलिस की कहानी में कई झोल हैं।” भाजपा ने इस मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है ताकि हत्या के पीछे के वास्तविक कारणों और पॉक्सो एक्ट के पहलुओं का सच सामने आ सके।

सरकार पर साधा निशाना: “8 दिनों तक क्यों साधी चुप्पी?”
प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद सत्ता पक्ष के नेता 8 दिनों तक गायब रहे। उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था को ‘ध्वस्त’ बताते हुए आरोप लगाया कि पिछले 6 सालों में झारखंड में अपराध और तुष्टीकरण की राजनीति को ही बढ़ावा मिला है।

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