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समुद्र में नई साझेदारी की तैयारी! भारत-सेशेल्स के बीच क्या होने वाला है बड़ा समझौता?

नई दिल्ली। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को हुई बैठक में दोनों पक्षों ने मौजूदा ढांचे की समीक्षा की, नए सहयोगी अवसरों पर चर्चा की और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। भारतीय नेतृत्व ने सेशेल्स प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच गहरी समुद्री साझेदारी है और भारत मत्स्य, जलीय कृषि, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने मत्स्य क्षेत्र और ब्लू इकोनॉमी को आर्थिक विकास, ग्रामीण रोजगार और सतत विकास के अहम स्तंभ बताया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि देश का वार्षिक मत्स्य उत्पादन 1.97 करोड़ टन तक पहुंच गया है और समुद्री उत्पादों का निर्यात 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर का है। भारत ने सतत मत्स्य प्रबंधन, जिम्मेदार दोहन और तकनीक आधारित ढांचे के विकास की अपनी पहल साझा की। बैठक में समुद्री जलीय कृषि, आधुनिक हैचरी, टूना मत्स्य अनुकूलन, स्टॉक आकलन, उन्नत पोस्ट‑हार्वेस्ट इंजीनियरिंग और समुद्री संरक्षण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त विकास की संभावनाओं पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने मत्स्य डेटा प्रणाली, निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रबंधन में साझेदारी की संभावनाएं तलाशीं। टूना प्रसंस्करण, उत्पाद विविधीकरण और सतत अपशिष्ट प्रबंधन पर भी जोर दिया गया। सेशेल्स ने मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र में विशेष द्विपक्षीय समझौता (एमओयू) करने की इच्छा जताई और संस्थागत ढांचे के जरिए निरंतर संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में आपसी महत्व, तकनीकी आदान‑प्रदान और उत्कृष्टता केंद्रों के सहयोग से क्षमता निर्माण पर भी सहमति बनी। भारत और सेशेल्स ने मत्स्य, जलीय कृषि और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने किया, जबकि सेशेल्स की ओर से मत्स्य, कृषि और ब्लू इकोनॉमी मंत्री वॉलेस कॉसग्रो ने प्रतिनिधित्व किया।

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