बिहार के किसान खेतों में उग रहे स्ट्रॉबेरी-ड्रैगन फ्रूट

पटना। बिहार में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार विदेशी फलों की खेती को तेजी से प्रोत्साहित कर रही है। विशेष रूप से स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलें छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए कम समय में अधिक आय का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही हैं।

राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि सरकार ने इन फसलों के योजनाबद्ध विस्तार का लक्ष्य निर्धारित किया है। स्ट्रॉबेरी विकास योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 3,02,400 रुपये की सहायता दी जा रही है, जो कुल इकाई लागत का 40 प्रतिशत है, जबकि ड्रैगन फ्रूट विकास योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 2,70,000 रुपये का अनुदान प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी अल्पावधि में तैयार होने वाली फसल है, जिससे किसान शीघ्र आय प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, ड्रैगन फ्रूट बहुवर्षीय और कम पानी में उगने वाली फसल है, जो लंबे समय तक स्थायी आय का स्रोत बन सकती है।

कृषि मंत्री ने बताया कि इन फसलों की खेती से गांव स्तर पर रोपण, तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन जैसे कार्यों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए नर्सरी प्रबंधन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (जैसे जैम, पल्प) के माध्यम से अतिरिक्त आय के रास्ते खुल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इन उच्च पोषण मूल्य वाले फलों के उत्पादन से ग्रामीण परिवारों की पोषण सुरक्षा भी मजबूत होगी। इच्छुक किसान, किसान समूह या महिला स्वयं सहायता समूह अपने प्रखंड या जिला उद्यान कार्यालय अथवा कृषि विज्ञान केंद्र से योजना की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि राज्य सरकार तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विपणन सहयोग के लिए तत्पर है। इसका उद्देश्य हर किसान परिवार को लाभकारी बागवानी से जोड़ना और ग्रामीण आय में वृद्धि करना है।

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