नई दिल्ली ; लोकसभा में विपक्ष ने कहा है कि सरकार ने बजट 2026 -27 में लोकहितों की अनदेखी कर विभिन्न क्षेत्रों के लिए व्यवस्थागत अन्याय किया है और कल्याण, रोजगार सृजन तथा कौशल विकास जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आवंटित पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा।
कांग्रेस के डॉ शशि थरूर ने बजट 2026-27 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार बड़ी बड़ी बात करती है लेकिन बजट में वित्तीय विवेक की बातें असहज करने वाली है और सरकार के खर्च में पिछले दशक में गिरावट आई है और सिर्फ महामारी के समय में इसमें वृद्धि हुई है। आम लोगों पर कर का बोझ लगाया गया है, राजस्व आम आदमी से आ रहा है और वित्तीय अनुशासन नदारद हैं। उत्पादकता तथा रोजगार बढ़ाने के लिए कोई उपाय नहीं हैं और कल्याणकारी योजनाओं का खर्च कम किया गया है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों पर बजट में ध्यान नहीं दिया गया है। उनका कहना था कि हमारी आबादी का 60 प्रतिशत कृषि पर निर्भर है और इसके लिए बहुत कम बजट आवंटित किया गया है जो चेतावनीपूर्ण है और इसका बहुत दुष्प्रभाव पड़ेगा। कृषि क्षेत्र के साथ व्यवस्थागत अन्याय हुआ है और पिछले आठ साल में सबसे कम आवंटन कृषि क्षेत्र के लिए किया गया है। पीएम किसान निधि पर सरकार मौन है और पिछले छह साल से किसान निधि सिर्फ छह हजार पर ही अटकी है। अंग्रेजों ने जिस तरह की लूट की थी वैसी स्थिति पैदा हो गई है जिससे संकट गहराता जा रहा है। आकांक्षा और हताशा टकरा रही है। रोजगार की स्थिति कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गयी है। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप के लिए बड़ी रकम खर्च ही नहीं हुई है। रोजगार सृजन के लिए तथा अन्य मदों के लिए आवंटित पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है।
योजनाओं के समयबद्ध निपटान के लिए कोई कदम नहीं उठाये गये हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना-मनरेगा को बदला ही नहीं गया है बल्कि इसे सीमित भी किया गया है। इसके लिए 95 हजार करोड़ रुपए का बजट है लेकिन ग्राम सभाओं में प्रौद्योगिकी को शामिल नहीं किया गया है सिर्फ नाम बदलने पर ही ध्यान दिया गया है। ग्रामीण कामगारों के लिए सांविधिक व्यवस्था नहीं है और यदि कोई ग्रामीण प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल नहीं जानते है तो उसे काम के अधिकार से वंचित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्यों पर बोझ पड़ रहा है। बेरोजगारी दर बहुत अधिक है और निवेश बहुत कम है। सरकार का ध्यान निवेश आकर्षित करने पर नहीं है। अमेरिका के साथ हाल में हुए व्यापार समझौते पर सरकार की स्थिति चिंताजनक है। वाणिज्य मंत्री इस बारे में विदेश मंत्री के पाले में और विदेश मंत्री वाणिज्य मंत्री की तरफ गेंद फेंकते हैं। इसका मतलब है कि सच्चाई कुछ और है लोगों को बहाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस बजट के जरिए सरकार के वादे पूरे नहीं होते हैं और सिर्फ लोगों को खुश करने का प्रयास किया जाता है और इस वजह से बदलाव कहीं नहीं दिखता है। नौकरियां बहुत कम हैं, छोटे कारोबारी ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं और श्रमिकों के सामने भी संकट बना हुआ है। हम विकसित विकास की बात करते हैं लेकिन यह सच्चाई से बहुत दूर है।
भाजपा की अपराजिता सारंगी ने कहा कि देश आज विदेशी निवेशकों के लिए भरोसेमंद गंतव्य के रूप में उभर कर आया है। इसकी वजह है देश का अनुशासनात्मक वित्तीय प्रबंधन और संरचनात्मक कार्यक्रम, जिसकी वजह से देश में आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास में गति आई है। पूरी दुनिया इसकी वजह से हमारी प्रशंसा भी करती है। उनका कहना था कि आज वैश्विक अस्थिरता है और विखंडित स्थिति पूरी दुनिया की है और इससे निपटने का एक ही सिद्धांत है कि चलते रहो चलते रहो।
उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता जब तक उसके पास विनिर्माण नहीं होगा। सरकार उस पर ध्यान दे रही है क्योंकि इससे निर्यात बढ़ेगा, देश का ढांचागत विकास तेज होगा और बेरोजगारी घटेगी। अच्छी बात यह है कि सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक जरूरत पर बजट में 40 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया ग
