धरती आबा की जन्मभूमि से उठी मिट्टी अब छत्तीसगढ़ में लिखेगी नई कहानी

खूंटी : भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु की पवित्र मिट्टी अब झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच सांस्कृतिक एकता की नई इबारत लिखने जा रही है। धरती आबा के इस पावन स्थल की मिट्टी से छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के दर्रीपारा, कुसमी में भगवान बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस पहल को दोनों राज्यों के बीच आत्मिक और सांस्कृतिक सेतु के रूप में देखा जा रहा है।
शनिवार को छत्तीसगढ़ से आए बिरसा मुंडा सेवा समिति, दर्रीपारा नगरपंचायत कुसमी के सदस्यों का उलिहातु में पारंपरिक रीति-विधियों के साथ स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि से मिट्टी संग्रह कर कलश में स्थापित किया और श्रद्धा के साथ यात्रा आरंभ की।
शाम तक जब यह कलश यात्रा कुसमी पहुंची, तो स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य, नगाड़ा और मांदर की थाप के बीच उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मिट्टी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई और इसे बिरसा मुंडा की प्रतिमा निर्माण के लिए शुभ प्रतीक माना गया।
समिति के सदस्यों ने कहा कि बिरसा मुंडा केवल झारखंड के जननायक नहीं, बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज के प्रेरणास्रोत हैं। उनकी जन्मभूमि की मिट्टी से बनी यह प्रतिमा उनके विचारों और संघर्षों की उस लौ को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है, जिसने जंगलों, जल-जमीन और जन की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी थी।
हालांकि मिट्टी संग्रह के दौरान कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने आपत्ति जताई कि गांव की मिट्टी बाहर ले जाने से पहले पंचायत की अनुमति जरूरी है। लेकिन संवाद और समझदारी से बात बनी और ग्रामीणों ने भावनात्मक सहमति दी।
स्थानीय लोग मानते हैं कि यह पहल न केवल दो राज्यों की सांस्कृतिक पहचान को जोड़ने वाली है, बल्कि धरती आबा बिरसा मुंडा के विचारों को नई भौगोलिक सीमा तक ले जाने वाली ऐतिहासिक घटना है।
एसजीवीएस अस्पताल के निदेशक और पद्मभूषण कड़िया मुंडा के सहयोगी डॉ. निर्मल सिंह ने बताया कि यह मिट्टी बिरसा के आदर्शों को जीवंत रखने की एक प्रतीक यात्रा है। आने वाले समय में जब छत्तीसगढ़ की धरती पर उनकी प्रतिमा खड़ी होगी, तो झारखंड की आत्मा वहां भी महसूस की जाएगी।

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