इंदौर : भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए इंदौर लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन बड़े अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। विभाग के कार्यपालन यंत्री (EE), एसडीओ (SDO) और उपयंत्री (Sub-Engineer) ने एक ठेकेदार से बिल पास करने के बदले लाखों रुपयों के कमीशन की डिमांड की थी।
बिल भुगतान के बदले मांगा ‘कमीशन’
यह कार्रवाई धार के सागोर निवासी ठेकेदार राजपाल सिंह पंवार की शिकायत पर की गई है। मैथवाड़ा-फोरलेन पहुंच मार्ग के 4.51 करोड़ रुपये के अंतिम बिल का भुगतान अटका हुआ था। अधिकारियों ने इस बिल को क्लियर करने के लिए कुल 3.50 लाख रुपये की मांग की थी।
ऐसे बिछाया गया जाल: 2.50 लाख जब्त
लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर दो अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की। EE जयदेव गौतम को इनके सरकारी आवास से 1.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया गया। SDO टी.के. जैन को इन्हें कार्यालय के पोर्च में ठेकेदार के प्रतिनिधि से 1 लाख रुपये लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा गया। उपयंत्री अंशु दुबे ने भी 1 लाख रुपये मांगे थे, लेकिन मौके पर पैसे कम होने के कारण इन्होंने राशि नहीं ली। हालांकि, साक्ष्यों के आधार पर इन पर भी शिकंजा कसा गया है।
कानूनी शिकंजा और कार्रवाई
इंदौर लोकायुक्त के निरीक्षक आशुतोष मिठास ने बताया कि तीनों अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 (धारा 7) और BNS 2023 (धारा 61-2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। ट्रैप टीम में प्रतिभा तोमर, विवेक मिश्रा और अन्य सदस्य शामिल थे।
सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए ठेकेदार की हिम्मत और लोकायुक्त की त्वरित कार्रवाई ने मिसाल पेश की है। अब तीनों अधिकारियों से आगे की पूछताछ जारी है।
