ट्रंप का बड़ा दांव : ईरान को दिया ‘शांति’ का अल्टीमेटम, लेबनान-इजराइल के बीच सुलह की तैयारी
वाशिंगटन/इस्लामाबाद : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर एक बार फिर चौंकाने वाला फैसला लिया है। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच ट्रंप ने अचानक ‘संघर्ष विराम’ (Ceasefire) बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। ट्रंप अब ईरान के एक “साझा प्रस्ताव” का इंतजार कर रहे हैं, जिससे युद्ध की आहट के बीच कूटनीति के लिए एक खिड़की खुल गई है।
ट्रंप का रुख: ‘सम्मान या समझौता’
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ताजा बयान में ईरान को दो टूक शब्दों में बातचीत की मेज पर आने को कहा है। उनके रुख की मुख्य बातें:
शर्तिया संघर्ष विराम: ट्रंप ने कहा कि वह तब तक युद्ध विराम जारी रखेंगे, जब तक ईरान कोई ठोस प्रस्ताव लेकर नहीं आता।
नाकाबंदी का दबाव: ट्रंप के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने ईरान को पस्त कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कोई ‘बेहतरीन समझौता’ नहीं होता, अमेरिका नाकाबंदी खत्म नहीं करेगा।
सोशल मीडिया पर वार: ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान अपनी इज्जत बचाने के लिए युद्ध की बातें कर रहा है, जबकि असल में वह शांति चाहता है।
पाकिस्तान में ‘खाली मेज’ और उम्मीदें
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए भारी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। स्कूल-कॉलेज बंद हैं और रेड जोन का दायरा बढ़ा दिया गया है। हालांकि, ईरान ने फिलहाल इस वार्ता से दूरी बना रखी है, जिससे पाकिस्तान की ‘शांति की मेज’ सूनी है। लेकिन ट्रंप के रुख में नरमी देखकर पाकिस्तानी अधिकारियों को उम्मीद है कि ईरान जल्द ही बातचीत के लिए राजी हो जाएगा।
इजराइल-लेबनान: सुलह का दूसरा दौर
ईरान संकट के बीच एक सकारात्मक खबर लेबनान और इजराइल की सीमा से आई है:
गुरुवार को बड़ी बैठक: वाशिंगटन में दोनों देशों के बीच राजदूत स्तर की वार्ता होगी।
मुख्य चेहरे: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और दोनों देशों के शीर्ष राजदूत इस बातचीत का हिस्सा होंगे।
मकसद: 14 अप्रैल को हुए 10 दिवसीय संघर्ष विराम को स्थायी शांति में बदलना।
सेना की चेतावनी: “हम तैयार हैं”
शांति की इन कोशिशों के बीच अमेरिकी सेना (US Central Command) ने अपना रुख सख्त रखा है। एडमिरल ब्रैड कूपर ने स्पष्ट किया कि युद्धविराम के दौरान अमेरिकी सैनिक शांत नहीं बैठे हैं, बल्कि वे अपनी रणनीति और तकनीक में बदलाव कर रहे हैं। नए सिरे से हथियार और रसद जुटा रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति में युद्ध के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।
ट्रंप की यह कूटनीति ‘दबाव और वार्ता’ का मिश्रण है। अब देखना यह होगा कि ईरान इस मौके को भुनाता है या मध्य-पूर्व का संकट और गहराता है।
