वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान के बीच राष्ट्र के नाम अपना पहला संबोधन दिया। व्हाइट हाउस से दिए गए इस 20 मिनट के भाषण में ट्रंप ने न केवल अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की सराहना की, बल्कि ईरान को दो-टूक चेतावनी भी दी। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने मुख्य रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के बेहद करीब है और अगले कुछ हफ्तों में यह संघर्ष समाप्त हो सकता है।
“पाषाण युग में लौट जाएगा ईरान”
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने संबोधन में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर ईरान समझौते की मेज पर नहीं आता है, तो आगामी दो-तीन सप्ताह में बड़े पैमाने पर बमबारी की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी हमले ईरान को “पाषाण युग” में लौटने पर मजबूर कर देंगे। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा स्रोतों (Energy Sources) पर सीधा प्रहार करने से पीछे नहीं हटेगा।
परमाणु क्षमता और सैन्य शक्ति पर बड़ा दावा
ट्रंप ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि 32 दिनों से जारी यह सैन्य अभियान बेहद सफल रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। उनकी मिसाइल प्रणालियां नष्ट कर दी गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि ईरान की परमाणु क्षमता को समाप्त करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है।
“यह सुरक्षित भविष्य के लिए सार्थक निवेश है”
अमेरिकी जनता में युद्ध को लेकर बढ़ती चिंता और गैस की बढ़ती कीमतों पर सफाई देते हुए ट्रंप ने इसे “सार्थक निवेश” बताया। उन्होंने कहा, “यह हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने वाला कदम है। अब ईरान हमारे लिए कोई बड़ा खतरा नहीं बचा है।” उन्होंने गैस की कीमतों में उछाल के लिए सीधे तौर पर ईरानी शासन की हिंसा को जिम्मेदार ठहराया।
पूर्व राष्ट्रपतियों पर साधा निशाना
अपने संबोधन में ट्रंप ने पिछली सरकारों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपतियों ने ईरानी शासन के उभार को रोकने के लिए समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए। ट्रंप ने स्पष्ट किया, “हमें ईरान के तेल की जरूरत नहीं है, हम केवल अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए वहां मौजूद हैं।”
सत्ता परिवर्तन का दावा
एक बड़ा दावा करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान में प्रभावी रूप से सत्ता परिवर्तन कर दिया है और वहां के कई प्रमुख नेताओं को हटा दिया गया है। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व को पहले की तुलना में कम कट्टरपंथी बताया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो अमेरिका अपनी रणनीतिक स्थिति और मजबूत करेगा।
