रांची। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) और स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के तहत संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (यूनिसेफ़) के सहयोग से ‘उमंग दिवस’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ शुक्रवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जमचूआ (नामकुम) में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने किया।
‘उमंग दिवस’ 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों के लिए एक मासिक सहभागिता मंच है, जिसका उद्देश्य उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी, परामर्श और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।
कार्यक्रम के दौरान अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने चल रहे सत्र का निरीक्षण किया और वहां उपस्थित किशोरों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), एएनएम, साहिया और समुदाय के सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने किशोर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की सराहना की।
इस मौके पर शशि प्रकाश झा ने कहा कि बच्चे अपने घर में बड़ों को देखकर सीखते हैं और उसी से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ते हैं। किशोरावस्था वह समय होता है जब बच्चों में जिज्ञासा सबसे अधिक होती है और वे स्वाभाविक रूप से कई सवाल पूछते हैं। उन्होंने कहा कि जो बच्चे अपनी जिज्ञासाओं और प्रश्नों के साथ आगे बढ़ते हैं, वही भविष्य में जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनते हैं।
उन्होंने किशोरियों की शादी 18 वर्ष और किशोरों की शादी 21 वर्ष की आयु के बाद ही करने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता जीवन को बेहतर बनाने की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह समाज में यह सोच है कि लड़का कमाने लगे तब उसकी शादी होनी चाहिए, उसी तरह यह सोच लड़कियों के लिए भी लागू होनी चाहिए। जब लड़कियां पढ़ेंगी, काम करेंगी और आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी वे सशक्त बनकर अपने जीवन को बेहतर ढंग से जी सकेंगी।
अनियमित दिनचर्या से बढ़ती हैं बीमारियां
कार्यक्रम के दौरान अभियान निदेशक ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना और असंतुलित खान-पान कई बीमारियों का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि इन आदतों से बचकर ही स्वस्थ जीवन संभव है। उन्होंने बताया कि ‘उमंग दिवस’ ऐसा मंच है जहां किशोर उन विषयों पर भी खुलकर चर्चा कर सकते हैं, जिनके बारे में वे अक्सर अपने माता-पिता से बात करने में संकोच करते हैं।
स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य पर होगी खुली चर्चा
राज्य समन्वयक (आरकेएसके) रफत फरजाना ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य किशोर-किशोरियों में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इसके साथ ही स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर संवाद के लिए एक सुरक्षित मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस मंच के माध्यम से स्वच्छता, संतुलित पोषण, शारीरिक गतिविधि और नशे के दुरुपयोग की रोकथाम जैसे निवारक स्वास्थ्य व्यवहारों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर परामर्श और रेफरल सेवाओं के माध्यम से किशोरों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाएगा।
