आदिवासी युवक ने घर को रेलगाड़ी के बोगी का दिया लुक

दुमका। आदिवासी युवक ने बेहतरीन कला का प्रदर्शन करते हुए अपने साधारण घर को ट्रेन की बोगी का लुक दे दिया है। अपने घर का नाम लताबानी एक्सप्रेस रखा है। आदिवासी युवक सोमराज मरांडी ने अपने घर बाहर से किसी रेलगाड़ी के बोगी सा लुक दे दिया। सोमराज का सपना है कि एक ट्रेन उसके गांव से होकर भी गुजरे, ताकि उसके बच्चे और गांव के लोग यह देख सके कि वास्तव में भारतीय रेलवे का ट्रेन होता कैसा है।

गांव के लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर दुमका रेलवे स्टेशन या फिर करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर पश्चिम बंगाल के सिउड़ी रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है। जिले के रानीश्वर प्रखंड के लताबानी गांव के रहनेवाला आदिवासी युवक सोमराज मरांडी पेशे से पेंटर है और अपने पेशे और कुछ खेतीबाड़ी करके अपना और परिवार का किसी तरह जीवन गुजर बसर कर रहा है। दो बच्चों की जिम्मेदारी और बच्चों को बेहतर तालीम के लिए सोमराज दिन रात मेहनत करता है। एक दिन अचानक उसके दिमाग में आया कि क्यों ना घर को एक ट्रेन की शक्ल दे दी जाए और फिर यही से उसकी कहानी शुरू होती है।

सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होता है और काफी लोग पसंद कर रहे है। हालांकि वीडियो में जो बताया जाता है, वो हकीकत से कुछ परे होता है। यह वीडियो दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के लताबानी गांव के सोमराज से जुड़ा हुआ है।

सोमराज का गांव में मिट्टी का साधारण सा घर है। चूंकि सोमराज कला के क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, तो करीब 8 माह पहले उसके दिमाग में आया कि क्यों ना अपने घर के बाहर दिवालों पर कुछ ऐसी कलाकृति बनाई जाए जो कुछ अलग हो। फिर करीब 3-4 दिन की मेहनत के बाद उसने अपने घर के बाहर की दिवालों में ट्रेन की तस्वीर बना दी। अमूमन पक्के मकानों में रहनेवाले लोग अपने मकान को बेहतर से बेहतर डिजाइनिंग बनाते है। लेकिन सोमराज की रचनात्मक सोच यह भी रही कि उसके मकान में बनाए गए ट्रेन की तस्वीर को देखकर गांव के लोग ट्रेन के बारे में जान पाए कि आखिर ट्रेन दिखने में कैसा होता है। सोमराज की यह कला पूरे इलाके में लोगो के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। सोमराज ने अपने घर को बिल्कुल ट्रेन की तरह रंग रोगन कर सजाया। घर की दीवारों पर ट्रेन की तरह खिड़कियां, दरवाजे बनाया जो दूर से देखने में किसी ट्रेन की कोच की तरह दिखता है।

सोमराज के मुताबिक उसने तो ट्रेन का सफर जरूर किया है, लेकिन गांव के कई लोग ट्रेन नहीं देखे है। साेमराज ने कहा कि उसकी इस मेहनत में उसकी पत्नी अनादि मुर्मू ने काफी साथ दिया। आज गांव के लोग उसकी इस कलाकृति को काफी पसंद करते है। सोमराज अपनी कला से काफी प्रभावित है और जब मौका मिलता तो गाना भी गुनगुनाता है।

सोमराज को एक कसक है कि उसके बच्चे अब तक ट्रेन का सफर नहीं कर पाए है। सोमराज की पत्नी अनादि मुर्मू गृहिणी है। अनादि के मुताबिक जब उनके पति ने ट्रेन की तस्वीर बनाने की सोची तो मुझे काफी अच्छा लगा। गांव के लोग भी तारीफ करते है। बच्चे भी काफी खुश है लेकिन सिर्फ एक टीस है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से बच्चे को कही घुमाने नहीं ले जा पाते।

इस बावत शिकारीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र से झामुमों विधायक आलोक सोरेन ने कहा कि आजादी के बाद अब तक इस क्षेत्र में ट्रेन आया नहीं है, लेकिन लोग अपने अपने तरीके से इसे अभिव्यक्त करते है। उन्हाेंने कहा कि सोमराज मरांडी ने अच्छा प्रयास है, उनकी कला सराहनीय है। हमारे सांसद की भी कोशिश और मांग भी है कि यहां से ट्रेन की एक व्यवस्था हो जो सिउड़ी से रानीश्वर होते हुए नाला रेल मार्ग से कनेक्ट हो। उन्हाेंने कहा कि झारखंड को हमेशा नजरअंदाज किया गया है और जिस रफ्तार से यहां विकास होना चाहिए वो नहीं हो पाया जो दुख की बात है।

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