पटना। बिहार विधानमंडल में बजट सत्र के चौथे दिन शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह की मांग पर सरकार ने घोषणा किया कि राज्य में अब विधायकों-विधान पार्षदों सदस्यों और सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा दी जाएगी। इससे प्रदेश के करीब 10 लाख कर्मचारी और उनके आश्रित लाभान्वित होंगे।
प्रश्नकाल के दौरान राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने सदन में कैशलेस सुविधा पर कहा कि, मंत्री की तरफ से कैशलेस का आश्वाशन दिया गया है। लेकिन अभी सरकार की तरफ से जो व्यवस्था है, उसमें बहुत खामियां है। जब हम जांच कराते है तो वहां बहुत सारी रसीद नहीं मिलती है, पैसे देने पर जांच की जाती है। कोई मरीज अस्पताल में दम तोड़ दें, उसके बाद सुविधा मिले, इसका कोई मतलब है। मुख्यमंत्री ने कैशलेस सुविधा की बात की थी, लेकिन इससे वंचित क्यों किया जा रहा है?. कैशलेस सुविधा कई सालों से विचाराधीन है, यह कब तक होगा?
इस सवाल पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि, सरकार इस बात से सहमत है। लेकिन जो सुविधा अभी हम दे रहे है, वो सुविधा सीजीएचएस में नहीं है। एक मुश्किल यह है कि एडवांस में पैसा देना पड़ता है। सम्राट चौधरी के जवाब पर राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि, सीधी बात है ‘कैशलेस’ उसके अलावा कोई डिमांड नहीं, कई बैठक हो चुकी है, घूमाने का काम नहीं किया जाय।
कैशलेस सुविधा पर भाजपा विधायक जिवेश मिश्र ने भी कहा कि दिल्ली एम्स के एमडी का हस्ताक्षर होने के बाद विधानसभा उसे वेरिफाई करती है, और सदस्यों को परेशान किया जाता है। इसका सरकार को उत्तर देना चाहिए।
इस पर राघवेंद्र प्रताप सिंह अड़ गए। जाले से भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने भी सरकार पर दबाव बनाते हुए कहा कि सरकार सदन में मौजूद है, तो बैठक की जरूरत क्यों। इसके बाद सम्राट चौधरी ने सदन में ही कैशलेस सुविधा देने की घोषणा कर दी।
अब तक बिहार के सरकारी कर्मचारियों के लिए इलाज की रीइंबर्समेंट व्यवस्था लागू थी।
विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए कैशलेस व्यवस्था की मांग उठाई। सरकार ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू की जाएगी और एक सप्ताह के भीतर इस पर बैठक होगी। विधायक आईपी गुप्ता ने बिहार में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य सुविधा पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल पूछा। आईपी गुप्ता ने कहा कि झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर खर्च बिहार का कम है। बिहार का औसत खर्च 701 रुपये सालाना है, जबकि झारखंड का 1014 और पश्चिम बंगाल का 1346 रुपये है, ऐसा क्यों?. इस पर सरकार की ओर से प्रभारी मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि, नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2023 में जो आंकड़ा प्रकाशित हुआ है, वह नेशनल हेल्थ एस्टीमेट 2019-20 के आधार पर है, जिसमें बिहार सरकार का खर्च 8,477 करोड रुपये दर्शाया गया है, जो 2024- 25 में बढ़कर 15,488 करोड़ हो गया है नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2023 के प्रकाशित आंकड़ों में जीएसडीपी का 1.5 प्रतिशत पर स्वास्थ्य पर खर्च होता है, जबकि झारखंड का 1.2 फीसदी, पश्चिम बंगाल का 1.1 फीसदी। बिहार सरकार लगातार स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा रही है।
विधायक आईपी गुप्ता के सवाल पर सम्राट चौधरी ने बताया कि सरकार इसके लिए नई पॉलिसी ला रही है, जिसका जल्द एलान होगा। सम्राट चौधरी ने कहा कि बेतिया और मधेपुरा मेडिकल कॉलेज में संसाधन उपलब्ध कराने के बावजूद डॉक्टर नहीं आ रहे हैं। इसी कारण पीपीपी मॉडल अपनाने का फैसला लिया गया है। साथ ही सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए भी पॉलिसी बनाने की बात कही गई।
भाजपा विधायक नीतीश मिश्रा ने सीएचसी में डॉक्टर, नर्स और स्टाफ की संख्या को लेकर सवाल किया। प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी के जवाब से सदन में ठहाके लगे। स्थिति संभालते हुए सम्राट चौधरी ने बताया कि 2025 में पद स्वीकृत हुए हैं और जल्द नियुक्ति की जाएगी।
