आकाश में साल का पहला और बेहद खास पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं, तब पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा को पूरी तरह ढक लेती है। इस दौरान सूर्य की लाल किरणें वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण चंद्रमा पर पड़ती हैं, जिससे चांद लाल आभा में नजर आता है। इसी वजह से इसे ब्लड मून (Blood Moon) कहा जाता है।
यह पूर्ण चंद्रग्रहण लगभग 3 घंटे 27 मिनट तक प्रभावी रहेगा। ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू हो चुका है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लागू हो जाता है। ऐसे में सुबह 6 बजकर 21 मिनट से सूतक प्रभावी माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक और ग्रहण काल में नए व शुभ कार्यों से बचना चाहिए। इस दौरान स्नान, दान, मंत्र जाप, स्तोत्र-पाठ, ध्यान और हवन-कीर्तन को अत्यंत फलदायी माना गया है। ग्रहण समाप्ति के बाद या अगले दिन सूर्योदय के समय स्नान कर योग्य ब्राह्मण को दान देने की परंपरा है।
भारत में यह चंद्रग्रहण खास तौर पर पूर्वोत्तर राज्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। मणिपुर की राजधानी इम्फाल में करीब 96 प्रतिशत तक ग्रहण देखा जा सकेगा। यहां चंद्रोदय शाम 5 बजकर 14 मिनट पर होगा और पर्वकाल लगभग 1 घंटा 33 मिनट रहेगा। अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से भी ग्रहण का भव्य दृश्य दिखाई देगा, जबकि तेजू में सबसे अधिक 1 घंटा 44 मिनट तक ग्रहण का प्रभाव देखने को मिलेगा।
