Homeझारखंडमछलियों की मौत पर उच्चस्तरीय जांच की मांग

मछलियों की मौत पर उच्चस्तरीय जांच की मांग

पूर्वी सिंहभूम। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरयू राय कहा कि बोर्ड में संसाधनों और वैज्ञानिकों की कमी है और जो व्यवस्था है, वह भी प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रही। उनका कहना था कि बोर्ड का ध्यान प्रदूषण नियंत्रण की बजाय औद्योगिक इकाइयों को अनुमति देने तक सीमित रह गया है। सरयू राय ने बताया कि उन्होंने 30 मार्च से 01 अप्रैल के बीच के प्रदूषण संबंधी आंकड़े राज्य और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर खोजे, लेकिन राज्य बोर्ड की साइट पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं मिली। केंद्रीय बोर्ड की वेबसाइट पर भी कई जरूरी आंकड़े अधूरे हैं। सरयू राय ने जिला उपायुक्त से मांग किया कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और एक निश्चित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि मछलियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। विधायक सरयू राय ने गुरुवार को भुईंयाडीह स्थित बाबूडीह और लालभट्ठा घाट का दौरा कर स्वर्णरेखा नदी में बड़े पैमाने पर हुई मछलियों की मौत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 31 मार्च को हुए भीषण जल प्रदूषण के कारण लाखों मछलियां मर गईं और तीन दिन बाद भी घाटों पर सड़ी-गली मछलियों के ढेर लगे हैं, जिससे क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि नदी किनारे का पानी काला पड़ चुका है और मृत मछलियों में कीड़े लग चुके हैं। उन्होंने आशंका जताई कि रिहायशी इलाकों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला दूषित बहाव इस घटना की मुख्य वजह हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदूषण का स्रोत औद्योगिक इकाइयां हैं या अवैध गतिविधियां, जिसकी जांच जरूरी है। राय ने कहा कि इस गंभीर मामले में जिला प्रशासन, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति की भूमिका अहम है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संस्थाओं ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है और उनकी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

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