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अरविंद केजरीवाल न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की बेंच की कार्यवाही में नहीं होंगे शामिल

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो जारी कर कहा कि उन्होंने ‘हितों के टकराव’ के कारण यह निर्णय लिया है। उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि सिद्धांतों से है। उनके मुताबिक न्याय केवल होना नहीं चाहिए बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। महात्मा गांधी के ‘सत्याग्रह’ का संदर्भ देते हुए केजरीवाल ने कहा कि यदि अंतरात्मा की आवाज कहती है कि गलत हो रहा है, अन्याय हो रहा है तो उसके खिलाफ चुप न रहो उसका सामना करो लेकिन उसका पहला कदम विरोध नहीं बल्कि बातचीत होना चाहिए। अपनी बात अन्याय करने वाले के सामने पूरी विनम्रता के साथ रखनी चाहिए और उसे सुधारने का पूरा मौका देना चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी अगर न्याय न मिले तो अंतरात्मा की आवाज़ सुनो, फिर शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए। बाद में उसके जो भी परिणाम हों वो सहर्ष स्वीकार करने चाहिए। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी भी प्रकार की नफ़रत या गुस्सा नहीं होना चाहिए। केजरीवाल ने कहा, “पूरी निष्ठा और विनम्रता के साथ न्यायमूर्ति स्वर्णकांता के सामने अपनी बात रखी। उन्हें इस मामले से अलग होने के लिए याचना की। मैंने आग्रह किया कि मेरा केस उच्च न्यायालय के किसी भी अन्य जज द्वारा सुन लिया जाए लेकिन उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दी। उन्होंने फैसला दिया कि वह अपने आप को इस मामले से अलग नहीं करेंगी और ये केस वो स्वयं ही सुनेंगी। उनके दिए गए इस फैसले से मैं पूरी विनम्रतापूर्वक असहमत हूं। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता जो भी फैसला सुनाएंगी, उस पर समय आने पर मेरे जो भी कानूनी अधिकार हैं जैसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती देना आदि, वो सभी कदम उठाने के लिए मैं स्वतंत्र हूं।” केजरीवाल ने कहा, “मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। पिछले 75 वर्षों में जब भी देश पर संकट आया, न्यायपालिका ने नागरिकों के हितों की रक्षा की है। मुझे इसी न्यायपालिका ने झूठे केस में निर्दोष घोषित किया और जमानत दी है।” उल्लेखनीय है कि केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर बेंच बदलने की अपील की थी लेकिन 20 अप्रैल को उनकी याचिका खारिज कर दी गई। उनका कहना है कि जस्टिस स्वर्णकांता ने उनके खिलाफ पहले से धारणा बना रखी है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया किया कि क्या जज निष्पक्ष फैसला ले पाएंगी? याचिका ख़ारिज करते हुए जस्टिस स्वर्णकांता ने कहा था कि बिना ठोस सबूत के लगाए गए आरोप केवल कयास हैं। यह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकते। केजरीवाल ने कहा था कि उनके पास जस्टिस शर्मा के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने का अधिकार अभी भी है। एक शपथ पत्र दाखिल कर केजरीवाल ने दावा किया था कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में शामिल हैं और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उन्हें काम सौंपते हैं। इस आधार पर केजरीवाल ने आशंका जताई कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से शायद ही उन्हें निष्पक्ष न्याय मिले। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की बेंच में चल रहे अपने केस की कार्यवाही में न तो स्वयं पेश होंगे और न ही उनकी तरफ से कोई वकील पैरवी करेगा।

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