नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यपाल, जो संवैधानिक विवेक के संरक्षक होते हैं, उनके पास कोई विकल्प नहीं है सिवाय इसके कि तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए। इसमें किसी तरह का सवाल ही नहीं उठता। कानून, परंपरा, संवैधानिक संस्कृति और पूर्ववृत्त सभी यही कहते हैं और अतीत में भी ऐसा कई बार हो चुका है। उन्होंने कहा कि `किसी अन्य गठबंधन ने दावा पेश नहीं किया है और कमी महज सात से आठ सीटों की है। राज्यपाल हमेशा यह शर्त रखते हैं कि दस से बारह दिनों में सदन के पटल पर बहुमत साबित किया जाए। ऐसे में समस्या कहां है। इस तरह संवैधानिक मानदंडों और परंपराओं का क्षरण बेहद निंदनीय है और इसे खेद के साथ कहना पड़ रहा है।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी देरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करती है और जनता के जनादेश का सम्मान करने में बाधा उत्पन्न करती है।उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को कांग्रेस ने समर्थन देने का ऐलान किया है। कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने कहा कि यह फैसला जनादेश का सम्मान करने के लिए लिया गया है। हालांकि टीवीके चीफ विजय ने अभी तक बहुमत के लिए आवश्यक 118 विधायकों के समर्थन का पत्र जमा नहीं किया है। उन्होंने मौखिक रूप से कहा है कि उनके पास बहुमत के लिए जरूरी संख्या मौजूद है। जानकारी के मुताबिक टीवीके ने राज्यपाल को 107+5 यानी 112 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपा। इस पर राज्यपाल ने कहा कि 118 हस्ताक्षरों के साथ वापस आएं। टीवीके ने इसके लिए कुछ समय मांगा है। तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक हलचल के बीच कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यपाल के रुख की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक परंपरा और कानून के अनुसार राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।
तमिलनाडु में सत्ता पर सस्पेंस! राज्यपाल के फैसले पर सिंघवी का बड़ा हमला
RELATED ARTICLES



