155 गिरफ्तारियां, करोड़ों का खेल और फिर कोर्ट का बड़ा फैसला!

रांची। जांच एजेंसियों के अनुसार, इनमें से तीन आरोपित पेपर सॉल्वर गिरोह के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे और अभ्यर्थियों तथा गिरोह के बीच संपर्क स्थापित करने की भूमिका निभा रहे थे। उल्लेखनीय है कि अदालत के निर्देश पर मामले के अनुसंधानकर्ता ने आरोपितों का आपराधिक रिकॉर्ड और केस डायरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की थी। इस बहुचर्चित मामले में अब तक लगभग 155 आरोपितों को विभिन्न चरणों में जमानत मिल चुकी है, जबकि कुछ प्रमुख आरोपित अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। दरअसल, 11 अप्रैल की रात पुलिस को सूचना मिली थी कि रांची जिले के तमाड़ थाना क्षेत्र स्थित रड़गांव में एक अर्धनिर्मित भवन में बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है। सूचना के आधार पर गठित विशेष छापेमारी दल ने देर रात वहां दबिश दी। पुलिस टीम के पहुंचते ही मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग भागने का प्रयास करने लगे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कुल 155 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपितों में कथित अंतरराज्यीय पेपर लीक और पेपर सॉल्वर गिरोह के सरगना बताए जा रहे पांच प्रमुख आरोपित अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद भी शामिल थे। इसके अलावा सात महिला आरोपितों को भी हिरासत में लिया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि गिरोह के एजेंटों ने बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को रड़गांव में ठहराया हुआ था। वहां उन्हें परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों के उत्तर रटवाए जा रहे थे। आरोप है कि गिरोह ने अभ्यर्थियों के मोबाइल फोन और प्रवेश पत्र अपने कब्जे में रख लिए थे ताकि किसी प्रकार की जानकारी बाहर न जा सके। पुलिस के अनुसार, अभ्यर्थियों से परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर प्रति उम्मीदवार 10-10 लाख रुपये तक की मांग की गई थी। कुछ अभ्यर्थियों ने भुगतान के लिए गिरोह के सदस्यों के नाम बैंक चेक भी जारी किए थे। मामले को लेकर तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी और इसके बाद से जांच लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं। झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में जेल में बंद छह आरोपितों को सोमवार को अदालत से राहत नहीं मिली। रांची की अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद सभी आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, केस डायरी और आरोपितों के आपराधिक इतिहास का अवलोकन करने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि मामले में कथित धन लेन-देन को लेकर कोई ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। बचाव पक्ष ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का भी हवाला दिया। हालांकि, अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिकाएं अस्वीकार कर दीं। मामले में जमानत याचिका दाखिल करने वालों में आशीष कुमार, विकास कुमार, योगेश प्रसाद, रंजीत कुमार उर्फ चुनचुन, गुलाब चंद महतो और बुलबुल पांडे उर्फ राज शामिल हैं।

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