डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक, सड़क से लेकर रोजगार तक पर फोकस
मोतिहारी।
भारत-नेपाल सीमा से सटे गांवों के विकास के लिए अब विशेष मुहिम शुरू होगी। जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को समाहरणालय में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II यानी VVP-II के तहत जिला स्तरीय समिति की बैठक हुई।
बैठक में तय हुआ कि जिले के 6 सीमावर्ती प्रखंडों के 12 रणनीतिक गांवों को इस योजना में शामिल कर उनका समग्र विकास किया जाएगा।
इन 12 गांवों का होगा विकास
- आदापुर – चन्द्रमन
- बनकटवा – बिजबनी
- छौड़ादानो – धर्मनगर, महुआवा, परसा
- घोड़ासहन – बरवा खुर्द, जमुनिया कवैया, झरोखर, समनपुर
- ढाका – परसा
- रक्सौल – भरतमही, पनटोका
क्या-क्या होगा इन गांवों में
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन गांवों में पहले गैप एनालिस किया जाए। यानी कहां क्या कमी है, उसे चिन्हित कर उसी के हिसाब से योजना बनाई जाए।
प्राथमिकता वाले क्षेत्र होंगे:
- आधारभूत सुविधा: सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा
- आजीविका: कौशल विकास, कृषि, लघु उद्योग, बैंकिंग
- कनेक्टिविटी: दूरसंचार और इंटरनेट
- संस्कृति: स्थानीय कला और संस्कृति का संरक्षण
SSB के साथ मिलकर बनेगी योजना
डीएम ने सभी जिला और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों के साथ SSB के अधिकारियों को भी आपसी समन्वय से काम करने को कहा। प्रत्येक गांव के लिए विस्तृत कार्य योजना और अनुमानित लागत का प्रस्ताव जल्द मांगा गया है।
बैठक में डीएम ने कहा “इस कार्यक्रम का मकसद सिर्फ सड़क-बिजली देना नहीं है। सीमावर्ती गांवों में रोजगार के अवसर पैदा कर पलायन रोकना, सरकारी योजनाओं का 100% लाभ पहुंचाना और लोगों को देश की मुख्यधारा से जोड़ना है।”
उन्होंने सभी विभागों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से काम करने का निर्देश दिया।
बैठक में सहायक समाहर्ता राजकृष्ण झा, SSB की 71वीं, 47वीं और 20वीं बटालियन के समादेष्टा, जिला योजना पदाधिकारी राहुल रंजन, सिविल सर्जन, DPO सहित कई अधिकारी मौजूद थे।

