नई दिल्ली : हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेता मनोज बाजपेयी ने कहा है कि दर्शक हमेशा उन कहानियों से जुड़ते हैं, जिनमें जीवन की सच्चाई और प्रामाणिकता होती है। उन्होंने कहा कि चाहे कहानी हास्य आधारित हो या गंभीर विषय पर, यदि उसमें वास्तविक जीवन की झलक हो तो वह लोगों के दिल तक पहुंचती है।
अपनी आगामी फिल्म गवर्नर को लेकर बातचीत में मनोज बाजपेयी ने बताया कि इस फिल्म में वह भारत के पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर एस. वेंकिटरमणन की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म 1991 के आर्थिक संकट और उस दौर में लिए गए ऐतिहासिक फैसलों की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि देश का सोना गिरवी रखने जैसा फैसला केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक विषय भी था। उस समय हालात ऐसे थे कि पारंपरिक उपाय पर्याप्त नहीं थे और साहसिक निर्णय लेना जरूरी हो गया था। उनके अनुसार संकट की घड़ी में लिए गए ऐसे निर्णयों ने देश को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
किरदार की तैयारी को लेकर मनोज बाजपेयी ने बताया कि भाषा, उच्चारण, शारीरिक हावभाव और मानसिक स्थिति को समझने के लिए व्यापक अध्ययन करना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि अर्थशास्त्र उनका विषय नहीं रहा है, इसलिए फिल्म की पृष्ठभूमि को समझने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी।
निर्देशक चिन्मय मांडलेकर के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अभिनेता होने के कारण चिन्मय कलाकारों की चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझते हैं। यही वजह है कि उनके साथ काम करना सहज और प्रभावी रहा।
मनोज बाजपेयी ने कहा कि आज भी उन्हें लगता है कि कई किरदार निभाना बाकी है। उनके अनुसार हर व्यक्ति अपने भीतर एक कहानी समेटे होता है और एक अभिनेता के लिए यह निरंतर सीखने और नए अनुभवों को जीने की प्रक्रिया है।
पुरस्कारों और उपलब्धियों पर उन्होंने कहा कि सम्मान खुशी जरूर देते हैं, लेकिन अभिनय के दौरान सबसे महत्वपूर्ण केवल किरदार और उसके प्रति ईमानदारी होती है। उन्होंने कहा कि खुद को दोहराने से बचना ही उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
दर्शकों के लिए संदेश देते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा कि उनके लिए बॉक्स ऑफिस से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि कहानी और किरदार पूरी सच्चाई के साथ लोगों तक पहुंचे। यदि दर्शक फिल्म देखकर कुछ महसूस करें और अपने साथ कोई विचार लेकर जाएं, तो वही किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी सफलता है।
