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रूस के साथ भारत का ऐसा दांव, जिसने बढ़ा दी दुनिया की बेचैनी!

नई दिल्ली। रूस ने ब्रह्मोस मिसाइल का उत्पादन करने के लिए फरवरी, 1998 में भारत के साथ एक संयुक्त कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस बनाई, जिसमें भारत की ओर से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूसी कंपनी एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया को शामिल किया गया। इस कंपनी में भारत की 50.5 फीसदी और रूस की 49.5 फीसदी हिस्सेदारी है। यह उन कुछ डिफेंस कंपनियों में से एक है, जो अपने उत्पादन के जीवन चक्र, डिजाइन और निरंतर उत्पादन से लेकर मार्केटिंग, ग्लोबल डिलीवरी और बिक्री के बाद के मेंटेनेंस तक संभालती है। यही कंपनी वर्तमान में विश्वस्तरीय ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का डिजाइन, उत्पादन और विपणन करती है, जिसे सबमरीन, जहाज, एयरक्राफ्ट और जमीन प्लेटफ़ॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल मैक 2.8 की रफ़्तार से चलती है, जो सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है। इसके अन्य संस्करण 800 किमी. तक मारक क्षमता वाले हैं। इस मल्टीरोल सिस्टम के अलग-अलग ऑपरेशनल प्लेटफॉर्म से जमीन और समुद्र दोनों लक्ष्यों पर निशाना साधा जा सकता है। अब यह कंपनी अगली पीढ़ी की एडवांस्ड हाइपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइल विकसित कर रही है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूरे भारत में चार उत्पादन केंद्र हैं, जिसमें सबसे नई फैसिलिटी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में है, जिससे कुल मिसाइल आउटपुट में काफी बढ़ोतरी हुई है। बाकी दक्षिण भारत में हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम और राजस्थान के पिलानी में हैं। लखनऊ का उत्पादन केंद्र चालू होने से मिसाइल का उत्पादन 20 फीसदी बढ़ गया है। भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदकर फिलीपींस एंटी-शिप वेपन सिस्टम खरीदने वाला पहला देश बन गया है, जबकि इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों ने भी इसे खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सह निदेशक अलेक्जेंडर मक्सिचेव ने कहा है कि लखनऊ प्लांट ने मिसाइलों का पहला बैच बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि इस फैसिलिटी के चालू होने से ब्रह्मोस मिसाइल बनाने की स्पीड और कैपेसिटी दोनों में काफी बढ़ोतरी हुई है। ब्रह्मोस वेंचर दोनों देशों के लिए बहुत फायदेमंद भी बन गया है। अब जब लखनऊ का नया प्लांट प्रोडक्शन में है तो एक्सपोर्ट ऑर्डर भी ज़रूर मिलेंगे। ब्रह्मोस एयरोस्पेस का वित्त वर्ष 2026 में राजस्व 5,200 करोड़ रुपये बढ़ना भारत की ग्लोबल डिफेंस बढ़त का संकेत है। रूस के साथ संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में नया प्लांट शुरू होने के बाद मिसाइल प्रोडक्शन 20 फीसदी बढ़ा दिया है। संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस के अब पूरे भारत में चार उत्पादन केंद्र है, जिसमें लखनऊ की सबसे नई फैसिलिटी ने मिसाइलों का पहला बैच बनाया है। ब्रह्मोस मिसाइल बनाने की स्पीड और कैपेसिटी दोनों में काफी बढ़ोतरी होने से निर्यात ऑर्डर ज्यादा मिलने की उम्मीद है।

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