कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में कोलकाता स्थित सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी वीआरएम बिजनेस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक राजेश गोयनका और अन्य आरोपितों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी के परिसर से अवैध कॉल सेंटर संचालित कर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जाता था।
20 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ठगी
ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया कि वीआरएम बिजनेस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक राजेश गोयनका ने अवैध कॉल सेंटर के संचालन के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराईं। यहां से कर्मचारी सॉफ्टवेयर सेवाएं उपलब्ध कराने के नाम पर विदेशी नागरिकों से कथित रूप से धोखाधड़ी करते थे।
एजेंसी का दावा है कि आरोपितों ने इस तरीके से कम से कम 20.35 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की, जिसका इस्तेमाल आभूषण खरीदने, अचल संपत्तियां अर्जित करने और अन्य निवेशों में किया गया।
13 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त और कुर्क
जांच के दौरान ईडी ने 2.35 करोड़ रुपये मूल्य की चल संपत्तियां और बैंक खाते जब्त एवं फ्रीज किए हैं। इसके अलावा 11.14 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां भी अस्थायी रूप से कुर्क की गई हैं।
प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर करते थे ठगी
यह मामला इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स, बिधाननगर थाना में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुआ था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपित प्रतिष्ठित सेवा प्रदाताओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर इंटरनेट आधारित दूरभाष सेवाओं के जरिए विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे। उन्हें तकनीकी सहायता, सदस्यता समाप्त करने, उपहार वाउचर और अन्य कथित सेवाओं के नाम पर भुगतान करने के लिए गुमराह किया जाता था, जबकि वादा की गई सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती थीं।
ईडी ने दाखिल किया आरोपपत्र
ईडी का कहना है कि जांच में राजेश गोयनका और उनकी कंपनी को अपराध से अर्जित धन का प्रमुख लाभार्थी पाया गया है। एजेंसी ने मामले में विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
