नई दिल्ली। देश में रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ निजी क्षेत्र की कंपनियां भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इसी क्रम में वेदांता समूह ने दावा किया है कि उसने पिछले छह वर्षों में अपने कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 20 लाख लोगों को प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाने में योगदान दिया है।
प्रशिक्षित कार्यबल की बढ़ रही जरूरत
डिजिटल तकनीक, स्वचालन और आधुनिक विनिर्माण के विस्तार के साथ उद्योगों को प्रशिक्षित कार्यबल की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है, लेकिन औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में कौशल विकास कार्यक्रमों को रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।
सरकारी योजनाओं से जुड़कर चल रहे कार्यक्रम
वेदांता समूह विभिन्न सरकारी योजनाओं के साथ मिलकर कौशल विकास कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इनमें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की योजनाएं, स्किल इंडिया इम्पैक्ट बॉन्ड, मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना तथा ओडिशा कौशल विकास प्राधिकरण से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।
स्थानीय रोजगार और उद्यमिता पर जोर
कंपनी के अनुसार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका और स्वरोजगार के अवसरों को भी मजबूत करना है। इसके लिए विभिन्न उद्योगों और कार्यान्वयन साझेदारों के सहयोग से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं, जो बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप हों।
देश-विदेश में संचालित हैं गतिविधियां
वेदांता समूह धातु, तेल एवं गैस, खनिज, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कार्यरत है। कंपनी का कहना है कि भारत के अलावा दक्षिण अफ्रीका, लाइबेरिया और नामीबिया में भी उसकी गतिविधियां संचालित हैं। समूह ने भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करने और सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है।


