नई दिल्ली। रिलायंस जियो को सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा के लिए बड़ी सफलता मिली है। भारतीय अंतरिक्ष नियामक इन-स्पेस ने जियो के करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) सैटेलाइट तैनात करने की योजना को तकनीकी मंजूरी दे दी है। इससे भारत के पहले स्वदेशी एलईओ सैटेलाइट नेटवर्क का रास्ता साफ हो गया है, जो एलन मस्क की स्टारलिंक को कड़ी टक्कर दे सकता है।
1,600 सैटेलाइट और 20 से ज्यादा ग्राउंड स्टेशन
जियो की योजना पृथ्वी की निचली कक्षा में 1,600 सैटेलाइट तैनात करने की है। इसके साथ देशभर में 20 से 22 ग्राउंड स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। कंपनी ने 4.5 से 5 टेराबिट प्रति सेकंड क्षमता वाली सैटेलाइट इंटरनेट सेवा का प्रस्ताव रखा है।
स्टारलिंक से अधिक क्षमता का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्टारलिंक को 600 गीगाबिट प्रति सेकंड क्षमता की मंजूरी मिली है, जबकि जियो ने इससे कहीं अधिक क्षमता का प्रस्ताव दिया है। वहीं, ऐमजॉन की एलईओ परियोजना को अभी तकनीकी मंजूरी का इंतजार है।
सरकार दे सकती है नियामकीय सहयोग
तकनीकी मूल्यांकन के बाद सरकार अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के माध्यम से ऑर्बिटल स्लॉट और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं में जियो को सहयोग दे सकती है। इससे कंपनी को वैश्विक स्तर पर सैटेलाइट संचालन के अधिकार हासिल करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी एलईओ सैटेलाइट नेटवर्क बनने से रणनीतिक रक्षा जरूरतों को मजबूती मिलेगी और विदेशी सैटेलाइट कंपनियों पर निर्भरता कम होगी। जियो भविष्य में ब्रॉडबैंड, सेल्युलर बैकहॉल और सीधे मोबाइल तक सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसी सेवाएं शुरू करने की भी तैयारी कर रहा है।

