गुवाहाटी। असम में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन ऊपरी असम के कई इलाकों में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, चार और शव मिलने के बाद बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है। राज्य में फिलहाल 10 जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जहां 6,54,838 लोग प्रभावित हैं।
810 गांव जलमग्न, 34,970 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित
बाढ़ से गोलाघाट, चराईदेव, कामरूप, होजाई, डिब्रूगढ़, शिवसागर, जोरहाट, शोणितपुर, कामरूप (मेट्रो) और नगांव जिले प्रभावित हैं। 28 राजस्व मंडलों के 810 गांव जलमग्न हैं। इसके साथ ही 34,970.8 हेक्टेयर कृषि भूमि भी बाढ़ के पानी में डूबी हुई है।
राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 90 राहत शिविर और 184 राहत वितरण केंद्र सहित कुल 274 राहत केंद्र स्थापित किए हैं। राहत शिविरों में 18,902 लोग रह रहे हैं, जबकि 1,23,114 लोगों को राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।
चार और शव मिले, हजारों पशु भी प्रभावित
25 जुलाई को चराईदेव जिले से एक और शिवसागर जिले से तीन शव बरामद किए गए। बाढ़ से कुल 4,54,071 पशु प्रभावित हुए हैं। इनमें 93,751 बड़े पशु, 57,897 छोटे पशु और 3,02,423 मुर्गियां शामिल हैं। वहीं 3,021 पशु बाढ़ के पानी में बह गए, जिनमें सबसे अधिक 3,016 पशु चराईदेव जिले के हैं।
राहत और बचाव कार्य तेज, 210 चिकित्सा दल तैनात
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के निर्देश पर राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्थानीय प्रशासन और प्रशिक्षित स्वयंसेवक राहत कार्य में जुटे हैं।
राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 210 चिकित्सा दल तैनात किए हैं। राहत कार्य के लिए 55 नावों का उपयोग किया गया, जिनकी मदद से 13 लोगों और 22 पशुओं को सुरक्षित निकाला गया।
राहत सामग्री का वितरण जारी
सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों के बीच बड़ी मात्रा में चावल, दाल, नमक, सरसों का तेल तथा पशुओं के लिए गेहूं और चावल का चोकर वितरित किया गया है। इसके साथ ही बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचों के नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
जोरहाट जिले में केंद्रीय राज्य मंत्री पवित्र मार्घेरिटा ने सांसदों, विधायकों और जिला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर राहत कार्यों और मौजूदा स्थिति का जायजा लिया।


