गुवाहाटी। असम में बाढ़ का पानी तेजी से उतर रहा है, लेकिन तबाही के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। खेतों में फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, जबकि घरों, सड़कों और विद्यालयों में जमा गाद लोगों के सामने नई चुनौती बन गई है। राज्य में बाढ़ से दो और लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, फिलहाल राज्य के नौ जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, होजाई, कामरूप, कामरूप (मेट्रो), नगांव और डिब्रूगढ़ शामिल हैं। इन जिलों के 24 राजस्व मंडलों के 763 गांवों में कुल 5,24,733 लोग प्रभावित हैं, जबकि 48,742.09 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है। धनसिरी (नुमालीगढ़) नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
दो और शव मिले, राहत कार्य जारी
26 जुलाई को चराईदेव जिले में दो और शव बरामद हुए। राहत एवं बचाव कार्य में राज्य आपदा मोचन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, सेना, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन जुटा हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में 152 चिकित्सा दल, 36 नावें और दो हेलीकॉप्टर राहत कार्य में लगाए गए हैं।
109 राहत शिविरों में 37 हजार से अधिक लोग
राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावितों के लिए 109 राहत शिविर और 245 राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं। राहत शिविरों में 37,724 लोग रह रहे हैं, जबकि 1,53,833 लोगों को राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।
मकान, पशुधन और फसलों को भारी नुकसान
बाढ़ से 579 कच्चे मकान पूरी तरह और 1,560 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा 51 पक्के मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। हजारों पशु प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में मवेशी बह गए हैं। सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भी व्यापक क्षति पहुंची है।
मुख्यमंत्री ने दिए हालात का आकलन करने के निर्देश
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद राज्य के सभी मंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे। सरकार ने राहत सामग्री के रूप में चावल, दाल, नमक, सरसों का तेल और पशुओं के चारे का वितरण भी तेज कर दिया है।


