नई दिल्ली। बचपन में पोलियो की चुनौती और निजी जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद हरियाणा की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
रेवाड़ी की रहने वाली शर्मिला ने साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। चार साल पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक से चूकने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और इस बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
शर्मिला धनखड़ ने जीता स्वर्ण पदक
महिला शॉट पुट एफ57 वर्ग के फाइनल मुकाबले में शर्मिला ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने छह प्रयासों में 9.48 मीटर, 9.58 मीटर, 9.81 मीटर, 9.17 मीटर, 9.37 मीटर और 9.60 मीटर का थ्रो किया।
उनका तीसरे प्रयास में 9.81 मीटर का थ्रो निर्णायक साबित हुआ। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। घाना की जिनाबु इसाह ने 8.65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि भारत की शिल्पा ने 7.26 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
दो साल की उम्र में हुआ था पोलियो
शर्मिला धनखड़ का जन्म 15 अगस्त 1986 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छिठरोली गांव में हुआ था। वह महज दो साल की थीं, जब तेज बुखार के बाद उन्हें पोलियो हो गया। इसके बाद उन्हें शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उनके जीवन में निजी परेशानियां भी आईं। कम उम्र में शादी के बाद उन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। परिवार के सहयोग से उन्होंने जिंदगी में नई शुरुआत की और अपने पति अजीत सिंह व दो बच्चों के साथ आगे बढ़ीं।
चार साल बाद पूरा किया सपना
शर्मिला ने वर्ष 2020 में कोच टेक चंद के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने 2021 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में वह चौथे स्थान पर रहकर पदक से चूक गई थीं, लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। चार साल बाद उसी मंच पर स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी मेहनत और जज्बे की मिसाल पेश की।


