नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर छात्रों के भविष्य के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने विधेयक को सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
खरगे ने सरकार से पूछे सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए यह विधेयक पहले क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक सुधारों के लिए नहीं, बल्कि दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को रोकने के उद्देश्य से लेकर आई है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के अधीन जांच एजेंसियां होने और कई राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं लगातार हो रही हैं। यदि सीबीआई, एनटीए और ईडी जैसी संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र तरीके से काम करतीं, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
जितेंद्र सिंह ने विधेयक का किया बचाव
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि सरकार ने 2024 के कानून के क्रियान्वयन से मिले अनुभवों के आधार पर संशोधन किए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की अवधारणा पहली बार 1992 में सामने आई थी, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस लंबे समय से लंबित कार्य को पूरा किया।
उन्होंने कहा कि देश में यूपीएससी, आरआरबी, आईबीपीएस और एनटीए जैसी प्रमुख एजेंसियां परीक्षाएं आयोजित करती हैं और सरकार का उद्देश्य इन परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
जांच और सुनवाई की समय-सीमा तय
संशोधित विधेयक में पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सत्र न्यायालयों को विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत के रूप में नामित करने का अधिकार होगा, ताकि आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मामलों की रोजाना सुनवाई कर फैसला किया जा सके।
विधेयक में दोषियों के लिए सजा भी कड़ी की गई है। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक या अन्य अनुचित साधनों के दोषी पाए जाने पर पांच से दस वर्ष तक की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। संगठित गिरोहों के मामलों में न्यूनतम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष जांच कार्यबल भी गठित कर सकेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2024 का कानून लागू होने के बाद अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं और पेपर लीक से जुड़े मामलों के कारण आत्महत्या की घटनाओं में कमी आई है।


