मुजफ्फरपुर।
बिहार को दहलाने वाले चर्चित भुटकुन शुक्ला हत्याकांड में करीब 29 साल बाद मुजफ्फरपुर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-10 की अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी दीपक कुमार सिंह को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने हत्या के साथ अवैध हथियार के इस्तेमाल के मामले में भी सजा सुनाई। जिसमें धारा 302 में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना किया है।
वहीं आर्म्स एक्ट धारा 27(1) में 3 साल का सश्रम कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना किया है।
- कैसे रची गई थी साजिश
90 के दशक में भुटकुन शुक्ला का नाम ही अपराध जगत में खौफ बन गया था। वैशाली के खंजाहाचक गांव में नारायणी नदी किनारे उसका गढ़ था। जांच में सामने आया कि दीपक कुमार सिंह को विरोधी गुट ने 1995 में भुटकुन के करीब पहुंचाया था। दो साल में उसने भरोसा जीतकर सुरक्षा घेरे में जगह बना ली और भुटकुन की दिनचर्या व गुप्त रास्तों की पूरी जानकारी ले ली।
- 16 जुलाई 1997 की वारदात
उसी जानकारी का फायदा उठाकर 16 जुलाई 1997 की सुबह दीपक ने हमला कर दिया। आरोप है कि नदी में स्नान के बाद पूजा कर रहे भुटकुन पर दीपक ने AK-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग की। मौके पर ही भुटकुन की मौत हो गई और आरोपी फरार हो गया।
लालगंज थाना कांड संख्या 100/1997 में चली लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत ने सजा सुनाई है। इस फैसले को 90 के दशक के बिहार के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में एक अहम न्यायिक पड़ाव माना जा रहा है।


