सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। शिवपुराण में बेलपत्र चढ़ाने के महत्व के साथ इसके कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।
भगवान शिव को क्यों प्रिय है बेलपत्र?
शिवपुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से उनके शरीर में तीव्र उष्णता उत्पन्न हुई। तब देवताओं ने उन्हें जल और शीतल प्रकृति वाले बेलपत्र अर्पित किए, जिससे उन्हें शांति मिली। इसी कारण बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के प्रमुख नियम
शिवपुराण में बेलपत्र अर्पित करते समय कुछ महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं।
- शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र कहीं से भी फटा या कटा हुआ नहीं होना चाहिए।
- बेलपत्र की पत्तियां कम से कम तीन संयुक्त पत्तियों वाली होनी चाहिए।
- बेलपत्र सोमवार या चतुर्थी तिथि को नहीं तोड़ना चाहिए। एक दिन पहले तोड़े गए बेलपत्र भी पूजा के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
- शिवलिंग पर हमेशा विषम संख्या में बेलपत्र अर्पित करें, जैसे 3, 5, 7, 11 या 21।
- गंदे, सूखे या अशुद्ध बेलपत्र अर्पित नहीं करने चाहिए।
बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि
शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा उल्टी दिशा में चढ़ाना चाहिए। इसका चिकना भाग ऊपर की ओर और खुरदरा भाग नीचे की ओर रहना चाहिए। इस प्रकार अर्पित किया गया बेलपत्र अधिक शुभ माना जाता है।
सावन में करें यह विशेष उपाय
सावन के महीने में बेलपत्र के वृक्ष की जड़ के पास घी का दीपक जलाना भी शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।


