गुवाहाटी। असम में बाढ़ का पानी तेजी से उतर रहा है, लेकिन धेमाजी और शिवसागर जिले में नदियों का जलस्तर एक बार फिर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। शिवसागर जिले में बाढ़ से व्यापक तबाही देखने को मिल रही है और सबसे अधिक प्रभावित ऊपरी असम के चार जिले शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट हैं, जहां जनजीवन अभी भी सामान्य नहीं हो पाया है।
प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए सरकारी और निजी स्तर पर अभियान जारी है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी अपने घरों में नहीं लौट सके हैं। बाढ़ ने उनके घर और आजीविका दोनों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
कृषि विभाग वैकल्पिक खेती की तैयारी में
राज्य सरकार के सभी विभाग प्रभावितों की सहायता में जुटे हैं। कृषि विभाग किसानों के लिए वैकल्पिक खेती की योजना तैयार कर रहा है, क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में धान की खेती संभव नहीं रह गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 1 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, दिखौ नदी (शिवसागर) और धनसिरि नदी (नुमलीगढ़) का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
हालांकि शनिवार को किसी नई जनहानि की सूचना नहीं मिली। राज्य में अब तक बाढ़ से कुल 82 लोगों की मौत हो चुकी है।
सात जिलों के 349 गांव अब भी प्रभावित
वर्तमान में गोलाघाट, शिवसागर, चराईदेव, बजाली, धेमाजी, शोणितपुर और जोरहाट जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इन सात जिलों के 20 राजस्व मंडलों के कुल 349 गांवों में बाढ़ का असर बना हुआ है। लगभग 1,78,837 लोग अभी भी प्रभावित हैं और 15,060 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है।
राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 44 राहत शिविर और 17 राहत वितरण केंद्र संचालित कर रखे हैं। राहत शिविरों में 11,489 लोग आश्रय लिए हुए हैं, जबकि 5,569 अन्य लोगों को राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।
राहत और बचाव अभियान जारी
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, अर्धसैनिक बल, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्थानीय प्रशासन और प्रशिक्षित स्वयंसेवक राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। शनिवार को प्रभावित क्षेत्रों में 79 चिकित्सा टीमों को तैनात किया गया और तीन नावों के माध्यम से राहत अभियान चलाया गया। बाढ़ के कारण राज्य में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।


