दोहा/वाशिंगटन/तेहरान । मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति जता दी है। लंबी वार्ताओं और कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों देशों ने इस सुलह की पुष्टि की है। प्रमुख मध्यस्थ देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दृढ़ता से कहा है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता हो गया है और यह अब प्रभावी हो चुका है। इस ऐतिहासिक समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर आगामी शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। इस समझौते के बाद 28 फरवरी से युद्ध का मैदान बने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह निर्बाध हो सकेगी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने की नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करने की घोषणा, तेल का प्रवाह होगा शुरू
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस समझौते की पुष्टि करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत समाप्त करने की घोषणा की है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर जहाजों की आवाजाही और तेल के प्रवाह को फिर से शुरू करने का आह्वान किया। दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि समझौते के अंतिम मसौदे पर दोनों पक्षों में पूर्ण सहमति बन चुकी है, जिससे लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त हो जाएगा। हालांकि, अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने ट्रंप की इस नीति की आलोचना करते हुए इसे 2015 के परमाणु समझौते को रद्द करने के बाद उपजे संकट का देर से किया गया समाधान बताया है।
वैश्विक नेताओं ने किया शांति समझौते का स्वागत, मध्यस्थ देशों की सराहना
दुनिया भर के प्रमुख नेताओं ने सोमवार को इस शांति समझौते का गर्मजोशी से स्वागत किया है। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इस समझौते को क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करने वाला बताया। एर्दोगन ने कूटनीतिक प्रयासों को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब की भूमिका की विशेष सराहना की। इसके साथ ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापारिक जलमार्गों को फिर से खोलने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कदम बताया है।
हस्ताक्षर से पहले बैठकों का दौर जारी, तकनीकी पहलुओं को दिया जा रहा अंतिम रूप
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर कार्यक्रम से पहले मध्यस्थ देश कई महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित करेंगे। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य समझौते को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करने की रूपरेखा तैयार करना और दोनों देशों के बीच तकनीकी बातचीत को अंतिम रूप देना है। अमेरिकी समाचार चैनल सीबीएस न्यूज के मुताबिक, यह कामयाबी वाशिंगटन और तेहरान के बीच हफ्तों तक चले विरोधाभासी संकेतों और असहमति के बाद मिली है। अब सभी पक्षों की निगाहें 19 जून को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर पर टिकी हैं, जो इजराइल, हिजबुल्लाह और गाजा सहित पूरे क्षेत्र के संकट में एक बड़ा यू-टर्न साबित हो सकता है।
